फतेहपुर में हत्या के मामले में 3 दोषियों को उम्रकैद:कोर्ट ने 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, गोबर डालने को लेकर विवाद
फतेहपुर की अदालत ने 2012 में हुई हत्या और मारपीट के मामले में बुधवार को फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-2 अजय सिंह प्रथम की अदालत ने लोला यादव, सिया देवी और जनकी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर हत्या के मामले में 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इसके अलावा मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के मामलों में भी अलग-अलग सजा और जुर्माना लगाया गया। जमीन पर गोबर डालने को लेकर हुआ था विवाद शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) अजय कुमार सिंह के मुताबिक, घटना 1 मार्च 2012 की सुबह करीब 7:30 बजे खागा थाना क्षेत्र के संवत गांव में हुई थी। वादी हरिश्चंद्र पुत्र भोला यादव के अनुसार, जमीन पर कब्जा करने की नीयत से लोला यादव गोबर डाल रहे थे। इस पर हरिश्चंद्र के पिता भोला यादव ने विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप था कि गाली-गलौज के बाद अतुल और उसकी पत्नी मंजू भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद आरोपियों ने हथियारों से हमला कर दिया। लोला यादव के पास कुल्हाड़ी, सिया देवी के पास लाठी और जनकी के पास डंडा था। मारपीट के दौरान भोला यादव के सिर में कुल्हाड़ी और लाठी से गंभीर चोटें आईं और वह मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। आरोपियों पर जान से मारने की धमकी देकर मौके से भागने का भी आरोप था। छह गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर फैसला घटना के दिन ही 1 मार्च 2012 को खागा थाने में आईपीसी की धारा 302, 323, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के एक गवाह रविकरन की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल छह गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने लोला यादव, सिया देवी और जनकी को दोषी करार दिया। हत्या, मारपीट और धमकी के मामले में सजा अदालत ने तीनों दोषियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। फैसले की जानकारी शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने बुधवार शाम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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