फतेहपुर में मां कूष्मांडा की पूजा को उमड़े भक्त:2200 दुर्गा पंडालों में दर्शन-पूजन, सुरक्षा में 1700 पुलिसकर्मी तैनात
यूपी के फतेहपुर जिले में बुधवार को नवरात्र का चौथा दिन:मां कूष्मांडा की पूजा और महिमा शारदीय/वासंतिक नवरात्र पर भगवती दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर केवल अंधकार था,तब देवी ने अपनी ईशत हास्य (मंद मुस्कान) से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और आद्यस्वरूपा माना जाता है। मां कूष्मांडा की कांति और आभा सूर्य के समान अत्यंत तेजस्वी है। इनका यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी ने शाकुंभरी रूप धारण करके हरी शाक-सब्जियों से धरती को पल्लवित और समृद्ध किया था। इसके अलावा, उन्होंने शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया और तीनों लोकों को मुक्ति दिलाई। मां कूष्मांडा को प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।शास्त्रानुसार,कूष्मांडा देवी की आराधना किए बिना कोई भी जप और ध्यान पूर्ण नहीं माना जाता। नवरात्र के चौथे दिन शाक-सब्जी और अन्न का दान करना अत्यंत फलदायी और पुण्यदायक होता है।माता के इस पावन स्वरूप में भक्तों के लिए तृप्ति और तुष्टि दोनों समाहित हैं।पूजा-अर्चना के दौरान भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए उनके उपासना मंत्र का जाप करते हैं "या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। वही नवरात्र का चौथा दिन:मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ मंदिरों और दुर्गा पंडालों में सुबह से पहुची रही है।पूरे जिले में 2200 दुर्गा पंडालों और मंदिरों में भक्तों की भीड़ सुबह से पहुची रही।दुर्गा पंडालों में कमेटी की ओर से भंडारा का आयोजन किया जा रहा।सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1700 पुलिस कर्मी लगाए गए हैं।
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