पिता बोले- बेटी को नहीं अपनाएंगे, बच्चों को मारा:औरैया में 3 बच्चों को डुबोकर मारने पर मां को हुई थी फांसी की सजा, अब हाईकोर्ट से बरी

Sep 25, 2026 - 09:20
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पिता बोले- बेटी को नहीं अपनाएंगे, बच्चों को मारा:औरैया में 3 बच्चों को डुबोकर मारने पर मां को हुई थी फांसी की सजा, अब हाईकोर्ट से बरी
‘मेरी बेटी ने बच्चों को मारा है। अब उससे हम न कोई रिश्ता रखेंगे, न उसको हम अपने घर पर रखेंगे। हम उसे अपनाना नहीं चाहते। बच्चों की मौत के बाद न मैं उससे कभी मिला और न ही उसके केस में पैरवी की।’ यह कहना है, फांसी की सजा से बरी हुई औरैया की प्रियंका के पिता प्रमोद का। प्रियंका पर 3 बच्चों को डुबोकर मारने का आरोप था। सेशन कोर्ट ने उसे फांसी की सजा दी थी, जिसे बुधवार (23 सितंबर) को हाईकोर्ट ने पलट दिया। हाईकोर्ट ने जिंदा बचे बच्चे की गवाही को भी खारिज कर दिया। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर प्रियंका के घर पहुंची और परिवारवालों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पति की मौत के बाद देवर के साथ रहने लगी थी बरौआ गांव की रहने वाली प्रियंका की शादी 2009 में इटावा के लुईया गांव के रहने वाले अवनीश से हुई थी। दोनों के 4 बेटे सोनू, आदित्य, माधव और मंगल हुए। 2020 में अवनीश की करंट लगने से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद प्रियंका अपने चचेरे देवर आशीष उर्फ डैनी के साथ रहने लगी थी। गांव में दोनों के साथ रहने पर लोग ताने मारते थे। बच्चों को लेकर दोनों शहर के बनारसीदास मोहल्ले में किराए के मकान में रहने लगे। आशीष सैलून में काम करने लगा। इसी बीच, बच्चों की परवरिश को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। आशीष प्रियंका और बच्चों के साथ मारपीट करता था। वह बार-बार कहता था कि तुम अपने बच्चों को मार डालो, तभी मैं तुम्हें साथ रखूंगा। महिला को फांसी और देवर को उम्रकैद की सजा मिली थी आरोप था कि 27 जून, 2024 को प्रियंका ने प्रेमी देवर के ताने से परेशान होकर 4 बच्चों को सेंगुर नदी में फेंक दिया था। इसमें से 3 बच्चों की मौत हो गई थी। 8 साल के सोनू को गांववालों ने बचा लिया था। सोनू ने ही मां के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी थी। 10 जुलाई, 2025 को सेशन कोर्ट ने प्रियंका को फांसी की सजा दी, जबकि देवर आशीष को उम्रकैद दी गई। दोनों पर 1-1 लाख जुर्माना भी लगा था। फांसी की सजा देते हुए कोर्ट ने किया था कमेंट एडीजे सैफ अहमद ने घटना को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए कहा था- जो महिला अपने बेटों को मार सकती है, उसे समाज में जीने का अधिकार नहीं है। बच्चों को डुबोने के बाद महिला के मन में ममता नहीं जागी। ऐसी घटना समाज में भय का माहौल पैदा करती है। इस घटना के बाद कैसे कोई यह दावे से कह सकता है कि एक बच्चा अपनी मां के साथ सुरक्षित रहेगा। अब पढ़िए हाईकोर्ट ने निर्णय पलटते हुए क्या लिखा… हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष प्रियंका और आशीष के खिलाफ अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए निचली अदालत के फैसले को रद्द किया गया। दोनों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया गया। बचपन में मां की मौत के बाद चाची ने पाला प्रियंका के मायके बरौआ गांव में पिता प्रमोद, चाचा कन्हैयालाल और चाची गीता देवी रहते हैं। गीता देवी ने बताया- प्रियंका को मैंने ही पाला-पोसा है। जब वह डेढ़ साल की थी, तभी उसकी मां की मौत हो गई थी। एक भाई पवन था। उसकी भी बीमारी से मौत हो गई थी। मैं एक बार प्रियंका से मिलने गई थी, तब उसे अपने किए पर पछतावा था। पिता बोले- बेटी से कभी कोई रिश्ता नहीं रखेंगे प्रियंका के पिता प्रमोद पहले तो हमसे बात करने को राजी नहीं हुए। फिर उन्होंने कहा- बेटी भले ही बरी हो गई हो, लेकिन उसने बच्चों को मार दिया था। मैं आज तक न उससे मिलने गया हूं, न ही उसकी कोई पैरवी की है। उससे मेरा कोई रिश्ता नहीं है। मेरे घर में उसके लिए कोई जगह नहीं है। मैं उसे कभी नहीं अपनाऊंगा। दोनों के घरवालों ने नहीं की पैरवी, सरकारी वकील मिले बता दें, प्रियंका और आशीष दोनों के घरवालों ने कोई पैरवी नहीं की। इस कारण शासन की तरफ से दोनों को सरकारी वकील दिया गया। दोनों के घर से कभी कोई मिलने नहीं आया। जेल में दोनों का व्यवहार शांत ही रहा। प्रियंका को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं दिखता था। जबकि आशीष असहज रहता था। कोर्ट में भी उसने फंसाने की बात कही थी। अब बच्चे का वो बयान पढ़िए, जिसने पहले सजा दिलाई थी कोर्ट में जज के सामने बेटे सोनू ने बताया था- मैं पहले इटावा में अपनी बुआ के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। अचानक एक दिन पिता की करंट से मौत हो गई। मां हम सबको नाना-नानी के घर ले गई। यहां आशीष उर्फ डैनी अंकल आते थे। मेरी मां और डैनी अंकल घंटों बात करते थे। मां कभी-कभी मुझे खाना नहीं देती थी, मारती भी थी। मेरे भाई-बहन बहुत छोटे थे। उन्हें भी खाना नहीं मिलता था, तो वो रोते रहते थे। एक दिन मां बोली कि तुम सबको लेकर डैनी के घर चलेंगे। हम लोगों को अंकल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते थे। लेकिन, मां नहीं मानी और हमें वहीं ले गई। वहां कुछ दिन बाद दोनों में झगड़ा शुरू हो गया। अंकल कहते थे कि इन बच्चों को इनकी नानी के घर पर छोड़कर आओ। सुबह बच्चों को तैयार करके ऑटो से निकली 26 जून, 2024 की रात को भी मां और अंकल का बहुत झगड़ा हुआ। इसके बाद हम सब सो गए थे। 27 जून की सुबह उठे, तो मम्मी ने हम सबको तैयार किया और ऑटो में बैठा लिया। उन्होंने कहा कि नानी के घर चल रहे हैं। नदी आने पर वह हम सबको लेकर उतर गई। इसके बाद पैदल हमें पानी के पास ले गई। अचानक से वह मेरे भाइयों के मुंह पानी में डुबोने लगीं। खाटू श्याम का नाम लेकर सांस रोकी, मरा समझकर छोड़ा मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। थोड़ी देर में मेरे भाई आदित्य, माधव और मंगल की मौत हो गई। मुझे भी वह डुबो रही थी। मुझे अचानक से पता नहीं क्या सूझा... मैंने खाटू श्याम बाबा का नाम लिया और अपनी सांस रोक ली। मम्मी हम सबको मरा समझकर जाने लगी। जैसे वह थोड़ा आगे गई, मैं निकलकर भागा। मम्मी ने पीछे मुड़कर देखा, तो मेरा पीछा करने लगी। लेकिन, मैं दौड़ते हुए सीधे प्रधान के घर चला गया तो मम्मी वहां से निकल गई। प्रधान के जरिए पुलिस और चाचा को घटना सूचना दी। इसके बाद सब लोग नदी के पास गए और मेरे भाइयों के शव निकाले। एसपी बोले- लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी हाईकोर्ट के फैसले में विवेचक भूपेंद्र सिंह राठी की लापरवाही सामने आई है। विवेचना में कई तथ्य छोड़े गए। प्रधान ने इस मामले की सबसे पहले पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन उसकी गवाही ही नहीं कराई गई। एसपी अभिषेक भारती ने कहा अभी ऑर्डर कॉपी नहीं मिली है। कॉपी पढ़ने के बाद अगर लापरवाही मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें… PAC जवान का दर्द-कुत्ता न खाए, ऐसा खाना देते हैं, बिस्तर पर सांप आते हैं; टॉयलेट खुद साफ करते हैं ‘हमें ऐसी जगह रखते हैं, जहां जानवर भी न रहें। जो कुत्ता भी न खाए, ऐसा खाना दिया जाता है। टॉयलेट तक खुद साफ करने होते हैं।’ बाराबंकी में PAC बटालियन में तैनात जवान देवेंद्र गुप्ता यह सब कहते हुए परेशान हो जाते हैं। दैनिक भास्कर ने जवान देवेंद्र से बात की। PAC में अव्यवस्थाओं को समझने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट…

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