पश्चिम बंगाल दिवस पर पीएम मोदी का संदेश
पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हुगली जिले में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत, विकास और ऐतिहासिक पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द झेलने के बावजूद बंगाल ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा है तथा अब विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 21 जून 2026
पश्चिम बंगाल दिवस समारोह में शामिल हुए प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्य के हुगली जिले के तारकेश्वर स्थित बालीगारी मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और विकास की संभावनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान राज्य की जनता को पश्चिम बंगाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बंगाल की धरती पर एक नई ऊर्जा और नए आत्मविश्वास का वातावरण दिखाई दे रहा है।
किसानों को मिली बड़ी सौगात
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से 8,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई।इसके साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत भी की गई। इनमें फसल बीमा योजना, डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत कृषि आंकड़ा प्रणाली, प्राकृतिक खेती मिशन और धन-धान्य कृषि योजना जैसी पहलें शामिल हैं।
रेलवे और सड़क परियोजनाओं का शुभारंभ
प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के लिए कई आधारभूत संरचना परियोजनाओं की भी आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि रेलवे, सड़क, कृषि और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाएं राज्य के विकास को नई गति प्रदान करेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगी।उनके अनुसार इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
बंगाल की संस्कृति और पहचान का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान बंगाल ने भारी पीड़ा, विस्थापन और हिंसा का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद राज्य ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को जीवित रखा। उनके अनुसार यही बंगाल की सबसे बड़ी ताकत है।
विभाजन के इतिहास को याद करने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि देश के विभाजन के समय परिस्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण थीं। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के गठन और उसकी पहचान को सुरक्षित रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को याद करने का दिन है जिसने राज्य की दिशा और भविष्य तय किया।
राजनीतिक मुद्दों पर भी साधा निशाना
जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस की नीतियों की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति और अवैध घुसपैठ जैसी चुनौतियों ने राज्य के विकास को प्रभावित किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में विकास और सुशासन को प्राथमिकता देकर राज्य को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
विकास और बदलाव की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की इच्छा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उनके अनुसार जनता विकास, रोजगार, आधारभूत संरचना और बेहतर अवसरों की अपेक्षा कर रही है।उन्होंने विश्वास जताया कि नई परियोजनाओं और योजनाओं के माध्यम से राज्य के विकास को और गति मिलेगी तथा पश्चिम बंगाल आने वाले वर्षों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बंगाल के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने जनता से विकास, स्वच्छता और सामाजिक समरसता के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के उज्ज्वल भविष्य को लेकर जो सपने स्वतंत्रता के बाद देखे गए थे, वे अब धीरे-धीरे साकार होते दिखाई दे रहे हैं और आने वाले समय में राज्य नई ऊंचाइयों को छू सकता है।