पंचायत चुनाव 3 माह में- क्या बोले वकील और याचिकाकर्ता:यूपी सरकार- इलेक्शन कमीशन को आदेश, मुख्य याचिकाकर्ता खुद वकील

Oct 15, 2026 - 07:54
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पंचायत चुनाव 3 माह में- क्या बोले वकील और याचिकाकर्ता:यूपी सरकार- इलेक्शन कमीशन को आदेश, मुख्य याचिकाकर्ता खुद वकील
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तय समयसीमा में चुनाव कराने का निर्देश दिया है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने का हवाला देकर सरकार ने चुनाव कराने में दिक्कतें बताई थीं। वहीं, निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं कोर्ट ने खारिज कर दीं। फैसले के बाद पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। याचिकाकर्ताओं और अपर महाधिवक्ता ने फैसले, चुनाव की समयसीमा और आगे की कानूनी संभावनाओं पर अपनी बात रखी। तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव पूरा कराएं अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि कोर्ट ने राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन दोनों को ही डायरेक्ट किया है तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव पूरा कराएं। टाइम एक्सटेंड भी नहीं किया जाएगा। साथ ही प्रशासक जो नियुक्त किए गए राज्य सरकार द्वारा उसका आदेश भी कुछ याचिकाओं में चैलेंज किया गया था। हाईकोर्ट ने उन सबको डिसमिस कर दिया। यानी कि ग्राम प्रधान जो प्रशासक हैं वही आगे कंटिन्यू करेंगे, जब तक व्यवस्था नहीं हो जाती है और नई पंचायतों का इलेक्शन नहीं हो जाता है। जानिए क्या बोले याचिकाकर्ता मुख्य याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर मुख्य याचिका उनकी थी। लखनऊ बेंच में प्रशासक नियुक्त किए जाने के खिलाफ कुछ याचिकाएं दायर की गई थीं। इन्हें भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में हमारी याचिका के साथ क्लब कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया। अब हाईकोर्ट की तरफ से समयसीमा तय कर दी गई है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि तीन महीने में चुनाव कराएं। हालांकि, तीन महीने में चुनाव हो पाते हैं या नहीं, देखना होगा। याचिकाकर्ता राय साहब यादव ने कहा कि सरकार का कहना था कि आयोग की रिपोर्ट अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में वह चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं है। सरकार आरक्षण व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर पाई थी। कोर्ट ने आरक्षण पर 6 महीने के भीतर फैसला लेने और तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। विधानसभा चुनाव आगे न जाएं, इसके लिए सरकार के पास क्या-क्या विकल्प? 1. सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दे सकती है अगर यूपी सरकार को लगता है कि तीन महीने के भीतर चुनाव कराना संभव नहीं है, तो वह हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। इसके लिए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की जा सकती है। सरकार सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने या चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग कर सकती है। सरकार सुरक्षा बलों की कमी, OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया या मतदाता सूची तैयार नहीं होने जैसी समस्याओं का हवाला दे सकती है। हालांकि, समय बढ़ाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगा। 2. हाईकोर्ट से भी समय बढ़ाने की मांग कर सकती है यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय हाईकोर्ट में भी समय बढ़ाने के लिए अर्जी दे सकती है। इसके लिए वह आदेश में बदलाव की मांग कर सकती है या पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है। सरकार तीन महीने की समयसीमा बढ़ाकर चार से छह महीने करने की अपील कर सकती है। सरकार विधानसभा चुनाव की तैयारियों, सुरक्षा बलों की तैनाती और बोर्ड परीक्षाओं के कारण होने वाली दिक्कतों का जिक्र कर सकती है। हालांकि, इन आधारों पर समय बढ़ेगा या नहीं, यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा। अभी पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं कोई भी पार्टी हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है, लेकिन इतने कम समय में चुनाव कराना प्रदेश सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। जनवरी से मार्च के बीच विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। सूत्रों की माने तो विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कोई भी दल पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। याचिकाकर्ता बोले- 3 महीने में चुनाव कराए सरकार और निर्वाचन आयोग मुख्य याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने बताया कि लखनऊ बेंच में प्रशासक नियुक्त किए जाने के खिलाफ कुछ याचिकाएं दायर की गई थीं। इन्हें भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में हमारी याचिका के साथ क्लब कर दिया गया था। हालांकि, आज कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया। अब हाईकोर्ट की तरफ से समयसीमा तय कर दी गई है। हालांकि, तीन महीने में चुनाव हो पाते हैं या नहीं, देखना होगा। पंचायत चुनाव के याचिकाकर्ता राय साहब यादव ने बताया- सरकार का कहना था कि आयोग की रिपोर्ट अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में वह चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं है। सरकार आरक्षण व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर पाई थी। कोर्ट ने आरक्षण पर 6 महीने के भीतर फैसला लेने और तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। अब जानिए पूरा मामला… मुख्य याचिकाकर्ता वकील इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट से मांग की थी कि राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संपन्न करने का विस्तृत कार्यक्रम जारी रखने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया था कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 या उससे पहले हो जाने चाहिए थे। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से एक हलफनामा मांगा था। कोर्ट ने पूछा था कि आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-ई के जनादेश के मुताबिक चुनाव संपन्न कराने की स्थिति में है या नहीं और समयसीमा पर चुनाव क्यों नहीं हो सकते? कोर्ट का कहना था कि राज्य निर्वाचन आयोग से यह अपेक्षा की जाती है कि चुनाव कराने का पूरा कार्यक्रम अंतिम रूप देकर अगली सुनवाई की तारीख से पहले रिकॉर्ड पर लाया जाए। इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट में दलील दी थी कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार, पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम 5 साल तक ही हो सकता है, इससे ज्यादा नहीं। इसलिए समय पर चुनाव कराना जरूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दलील दी गई थी कि यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12-BB के अनुसार प्रधान के सामान्य चुनाव या उपचुनाव की तिथि तय करने की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। यह अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से जारी की जाती है। हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन को फटकार लगाई थी 9 अक्टूबर को सुनवाई में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था। कहा था कि ऐसा लगता है कि कमीशन ने फील्ड में जाकर नहीं, बल्कि दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी है। हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के लिए आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। कहा था कि आगरा जिले में 3 लाख से अधिक ओबीसी आबादी है। अखबारों में विज्ञापन के बावजूद केवल 179 लोग आयोग के पास पहुंचे। महज 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए। ------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… यूपी पुलिस सिपाही भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी:32,679 पदों पर चयन, कटऑफ भी घोषित; 4 महीने पहले हुई थी परीक्षा यूपी पुलिस की सिपाही भर्ती-2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट, मेडिकल और डॉक्यूमेंट की जांच के बाद पास होने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी गई है। जनरल वर्ग के 6685, OBC के 18210, SC के 7136 और ST वर्ग के 648 अभ्यर्थी पास हुए हैं। इनमें महिला अभ्यर्थियों की संख्या 4481 है। पूरी खबर पढ़िए…

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