प्रभु श्रीराम के अमोघ अस्त्र से धराशायी हुआ कुंभकर्ण:रामलीला मैदान में राम-कुंभकर्ण युद्ध का मंचन, जलाया 40 फुट का पुतला
आगरा के रामलीला मैदान में रविवार को राम-कुंभकर्ण युद्ध के दौरान तीरों की बौछार, तलवार और गदा से वार और तोप के गोलों के धमाकों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। प्रभु श्रीराम के अमोघ अस्त्र से कुंभकर्ण का वध होते ही मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद करीब 30 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया। पुतला जलते ही दर्शकों ने जयकारे लगाए। युद्ध के दौरान मैदान में गिरे तीरों को उठाने के लिए दर्शक भी दौड़ते नजर आए। सोमवार को मेघनाद वध की लीला का मंचन होगा। इसके बाद करीब 90 फुट लंबे मेघनाद के पुतले का दहन किया जाएगा। रविवार की लीला की शुरुआत लक्ष्मण के मूर्छा से जागने के प्रसंग से हुई। रामसेना के पराक्रम से चिंतित रावण ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कुंभकर्ण को जगाने का निर्णय लिया। छह महीने तक सोने वाले कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण स्वयं उसके महल पहुंचा। काफी प्रयासों के बाद कुंभकर्ण की नींद टूटी। इसके बाद वह विशाल शरीर के साथ युद्धभूमि की ओर बढ़ा। तीरों की बौछार के बीच हुआ घमासान युद्ध रामलीला मैदान में राम और कुंभकर्ण की सेनाओं के आमने-सामने आते ही युद्ध शुरू हो गया। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की ओर से शत्रु सेना पर तीर चलाए गए। जवाब में कुंभकर्ण की सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया। दोनों ओर से तलवार, गदा और भालों से प्रहार किए गए। रथों पर सवार राम और कुंभकर्ण के स्वरूपों के बीच युद्ध देखने के लिए दर्शक उत्साहित रहे। दर्शक कभी मैदान में चल रहे युद्ध को देखते तो कभी एलईडी स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहते। युद्ध के दौरान मैदान में गिरे तीरों को उठाने के लिए दर्शक रथों के आगे-पीछे दौड़ते रहे। सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया। कुंभकर्ण पर प्रभु श्रीराम के लगातार प्रहार होते रहे, लेकिन उसका विशाल शरीर और युद्ध कौशल चुनौती बना रहा। अंत में प्रभु श्रीराम ने अमोघ अस्त्र चलाया। इसके लगते ही कुंभकर्ण का शीश धड़ से अलग होकर जमीन पर गिर गया। कुंभकर्ण के वध के साथ ही मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद कुंभकर्ण के उद्धार का प्रसंग दिखाया गया। आतिशबाजी के बीच हुआ पुतला दहन कुंभकर्ण के वध के बाद मैदान में आतिशबाजी शुरू हो गई। तोप के गोलों के धमाकों के बीच करीब 40 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया। पुतला धू-धू कर जलने लगा तो दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पुतला दहन से पहले हुई आतिशबाजी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। स्वरूपों की आरती हेल्प आगरा के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, गौतम सेठ, शांति स्वरूप गोयल, राज किशोर खंडेलवाल, अनिल वर्मा, नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और अपना घर अन्नपूर्णा महिला आश्रम के सदस्यों ने की। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, टीएन अग्रवाल, भगवानदास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, मनोज (पोली), विष्णु दयाल बंसल, संजय तिवारी, महेश चंद, राकेश जैन, संजय अग्रवाल, रामाशीष शर्मा, रामांशु शर्मा, अजय अग्रवाल, दिलीप कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष तार, राहुल शर्मा और राहुल गौतम सहित अन्य लोग मौजूद रहे। युद्ध के दृश्यों का संचालन मुकेश जौहरी, प्रवीण स्वरूप, प्रकाशचंद, आनंद मंगल और अंजुल बंसल ने किया। आज होगा मेघनाद वध, जलेगा 90 फुट लंबा पुतला श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को मेघनाद वध के अवसर पर विशेष आतिशबाजी की जाएगी। इसमें प्रमुख आतिशबाज अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि सोमवार, 19 अक्टूबर को शाम सात बजे से मेघनाद वध की लीला का मंचन होगा। इसके बाद मेघनाद के करीब 90 फुट लंबे पुतले का दहन किया जाएगा।
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