प्रयागराज-चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का मेडिकल-वेतन रोका:प्राचार्य पर उत्पीड़न का आरोप, CM और उच्च शिक्षा निदेशक से शिकायत

Oct 07, 2026 - 14:34
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प्रयागराज-चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का मेडिकल-वेतन रोका:प्राचार्य पर उत्पीड़न का आरोप, CM और उच्च शिक्षा निदेशक से शिकायत
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और लखनऊ के राजकीय महाविद्यालय, लतीफनगर में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी वर्मा ने प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय पर मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने के बावजूद वेतन रोक दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और विभाग के अन्य अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है। प्रो. वर्मा ने महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुषमा देवी के खिलाफ कार्रवाई और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह से भी शिकायत कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की गुहार लगाई है। प्राचार्या का पक्ष इस मामले में नहीं मिल सका है। 19 दिन मेडिकल लीव पर थे प्रोफेसर प्रो. वर्मा के मुताबिक, वह 7 सितंबर से 25 सितंबर तक चिकित्सीय अवकाश पर थे। स्वस्थ होने के बाद 26 सितंबर को कॉलेज पहुंचे और कार्यभार ग्रहण किया। इसी दिन उन्होंने अवकाश से संबंधित प्रार्थना पत्र और मेडिकल सर्टिफिकेट कार्यालय में जमा कर दिया। CMO की जगह दूसरे अधिकारी को भेजा प्रमाण-पत्र शिकायत में प्रो. वर्मा ने कहा कि नियम के मुताबिक मेडिकल सर्टिफिकेट पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के स्तर से प्रतिहस्ताक्षर होना था। आरोप है कि प्राचार्या ने प्रमाण-पत्र CMO को भेजने के बजाय 28 सितंबर को बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ के निदेशक/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को स्पीड पोस्ट से भेज दिया। उनका दावा है कि इस पत्राचार के चलते प्रमाण-पत्र समय पर वापस नहीं आ सका और इसी वजह से उनका वेतन रोक दिया गया। प्रोफेसर बोले- करीब 20 साल से डायबिटीज से पीड़ित हूं प्रो. वर्मा ने शिकायत में बताया कि वह करीब 20 वर्षों से गंभीर मधुमेह से पीड़ित हैं। इलाज में उनकी आय का बड़ा हिस्सा दवाइयों पर खर्च होता है। वेतन रुकने के बाद उन्होंने आर्थिक परेशानी बढ़ने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई से उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत में उन्होंने अपने स्वास्थ्य पर किसी तरह का विपरीत असर पड़ने की स्थिति में प्राचार्या को जिम्मेदार ठहराया है। जांच और कार्रवाई की मांग प्रो. वर्मा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और प्राचार्या डॉ. सुषमा देवी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और भविष्य में किसी अन्य शिक्षक को ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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