प्रयागराज के दारागंज में दूसरे दिन भी निकलीं मां काली:आशीर्वाद लेने उमड़े श्रद्धालु, 12 अक्टूबर से शुरू हुआ पांच दिवसीय काली स्वांग
संगम नगरी प्रयागराज के दारागंज में पांच दिवसीय काली स्वांग की परंपरा के तहत मंगलवार को दूसरे दिन भी मां काली अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए निकलीं। मां काली के दर्शन के लिए शाम से ही सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और पारंपरिक वेशभूषा में मां काली का स्वरूप धारण किए कलाकार को देखने के लिए लोग देर तक इंतजार करते रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज और जयकारों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। दारागंज में काली स्वांग की शुरुआत 12 अक्टूबर से हुई है। यह आयोजन पांच दिनों तक चलेगा। परंपरा के अनुसार, प्रतिदिन शाम को मां काली का स्वरूप धारण किए कलाकार सड़कों पर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रद्धालु सड़क के किनारे खड़े होकर मां काली के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के छठवें दिन इस आयोजन का समापन होगा।
200 साल पुरानी है परंपरा दारागंज का काली स्वांग प्रयागराज की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है। पीढ़ियों से लोग इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि काली स्वांग के दौरान मां काली स्वयं अपने भक्तों के बीच आती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के चलते लोग देर रात तक मां के दर्शन का इंतजार करते हैं। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचकर मां के सामने माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। काली स्वांग में कलाकार मां काली का रौद्र रूप धारण करते हैं। खप्पर, मुंडमाला और भुजाली के साथ उनकी वेशभूषा लोगों को आकर्षित करती है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकार का नृत्य इस आयोजन को खास बनाता है। धार्मिक आस्था के साथ यह परंपरा प्रयागराज की लोक संस्कृति को भी जीवित रखे हुए है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर दारागंज के लोगों में उत्साह है। श्रद्धालुओं को अब अगले दिनों में भी मां काली के दर्शन का इंतजार रहेगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)