प्रयागराज के महर्षि पतंजलि विद्यालय में गूंजी गीता की अमृत-वाणी:बच्चों ने एक स्वर में किया 15वें अध्याय का पाठ
प्रयागराज की महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय का प्रांगण शनिवार को श्रीमद्भगवद्गीता के पवित्र श्लोकों और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। मौका था चिन्मय मिशन की ओर से 'चिन्मय अमृत महोत्सव' के तहत आयोजित ‘समर्पणम् गीता चेंटिंग’ कार्यक्रम का। इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना था। कार्यक्रम का शुभारंभ चिन्मय मिशन के सदस्यों और विद्यालय परिवार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद प्रथम पूजित विघ्नहर्ता श्री गणेश वंदना और बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गुरु वंदना से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। परंपरा का निर्वाह करते हुए चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास की ब्रह्मचारिणी शाश्वती जी के सान्निध्य में 108 नामावली के साथ श्रीमद्भगवद्गीता का पूजन-अर्चन किया गया। समारोह का सबसे आकर्षण पल वह था जब हज़ारों विद्यार्थियों और श्रोताओं के कंठों से श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय के श्लोकों का सस्वर गायन शुरू हुआ। श्लोकों के सटीक उच्चारण और उनके भावों ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इससे पहले ब्रह्मचारिणी शाश्वती जी और छात्र-छात्राओं ने संयुक्त रूप से 'गीता पंचामृतम्' का लयबद्ध गायन प्रस्तुत कर श्रोताओं के हृदयों में भक्ति का अलौकिक भाव जगा दिया। विद्यालय की सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता ने मानव कल्याण के लिए संकल्पित चिन्मय मिशन के उद्देश्यों और इसकी वैश्विक प्रगति पर प्रकाश डाला। इसके बाद स्वामी अभेदानंद ने अपने आशीर्वचन से अभिभूत किया और सभी को चिन्मय मिशन की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में शिक्षाविद् राजीव त्रिपाठी और एमएनएनआईटी प्रयागराज के मैकेनिकल विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने शिरकत की। विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्या अल्पोना डे, माधुरी श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह, प्राचार्या विभा श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ, गीता और पवित्र तुलसी का पौधा भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों और छात्र-समूह ने साक्षात ज्ञान स्वरूपा भागवत गीता की आरती की। सहभागियों को प्रसाद पुस्तिका 'गीता पंचामृतम्' और प्रसाद के रूप में बूंदी वितरित की गई। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन और पूर्णाहुति मंत्रोच्चार के साथ इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान का समापन हुआ।
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