प्रयागराज में 216 प्रधानाचार्यों को मिला दक्ष प्रशिक्षण:स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए डीआईओएस ने की अपील

Oct 12, 2026 - 18:21
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प्रयागराज में 216 प्रधानाचार्यों को मिला दक्ष प्रशिक्षण:स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए डीआईओएस ने की अपील
माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने और विद्यालयों को उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से जिले 216 प्रधानाचार्यों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्रशिक्षित किया गया। इन प्रधानाचार्यों को दक्ष’ हस्तपुस्तिका की विषयवस्तु के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के समापन के अवसर पर डायट प्राचार्य एवं डीआईओएस डॉ. संतोष कुमार राय ने प्रधानाचार्यों को प्रमाणपत्र वितरित किए। उन्होंने प्रधानाचार्यों से अपने विद्यालयों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने के लिए पूरी लगन और जिम्मेदारी से कार्य करने की अपील की। डीआईओएस डॉ. संतोष कुमार राय ने कहा कि विद्यालय को उत्कृष्ट संस्थान बनाने में प्रधानाचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्हें शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, विद्यालय की व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण में मिली जानकारी और ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका में बताए गए बिंदुओं को विद्यालयों की कार्यप्रणाली में लागू करने पर जोर दिया। इससे विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने और प्रबंधन को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर मोहम्मद रफीक, वीरभद्र प्रताप और डॉ. धनंजय यादव ने ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका की विषयवस्तु के आधार पर प्रधानाचार्यों के कार्यों एवं दायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यालय संचालन, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और शैक्षिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाचार्यों ने विषय से संबंधित सवाल पूछे। मास्टर ट्रेनर्स ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए जरूरी सुझाव भी दिए। प्रशिक्षण में शामिल प्रधानाचार्यों ने सभी सत्रों में तल्लीनता और मनोयोग से भाग लिया तथा अपने सुझाव साझा किए। प्रधानाचार्यों ने कहा कि ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका में वर्णित बिंदुओं को विद्यालयों में क्रियान्वित करने का प्रयास करेंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रधानाचार्यों को उनके कार्यों और जिम्मेदारियों के प्रति अधिक स्पष्टता प्रदान करना तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण, प्रभावी प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना रहा।

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