प्रयागराज में अलोप शंकरी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु:नवरात्रि के चौथे दिन कूष्मांडा स्वरूप की पूजा, सुख-समृद्धि की कामना

Oct 14, 2026 - 09:19
0
प्रयागराज में अलोप शंकरी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु:नवरात्रि के चौथे दिन कूष्मांडा स्वरूप की पूजा, सुख-समृद्धि की कामना
प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेककर लाल चुनरी, नारियल और फूल चढ़ाए। लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। मंदिर में बच्चों को वेदी से स्पर्श कराकर आशीर्वाद लेने वाले परिवार भी नजर आए। नवरात्रि में मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करती हैं। पालने के रूप में होती है माता की पूजा मां अलोप शंकरी मंदिर की सबसे खास पहचान यहां स्थापित पालना है। मंदिर में देवी की पारंपरिक मूर्ति के बजाय पालने की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि माता सती के शरीर का एक अंग यहां अलोप हो गया था, इसलिए इस स्थान का नाम अलोप शंकरी पड़ा। इसे प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि सभी शक्तिपीठों के दर्शन के बाद यहां अंतिम आशीर्वाद लिया जाता है। बच्चे के पहले मुंडन के लिए पहुंचते हैं परिवार मंदिर में परिवार की पहली संतान के जन्म के बाद बच्चे का पहला मुंडन संस्कार कराने की परंपरा है। मुंडन के बाद बच्चे को मंदिर की वेदी से स्पर्श कराया जाता है। श्रद्धालु इसे मां भगवती का आशीर्वाद पाने का माध्यम मानते हैं। मंदिर में नवविवाहित जोड़े भी दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना लेकर पहुंचते हैं। श्रद्धा के अनुरूप मिलता है आशीर्वाद: महंत महंत यमुना पुरी जी के अनुसार, मां के दरबार में आने वाले भक्तों की श्रद्धा और भावना के अनुरूप माता उन्हें सुख, समृद्धि और प्रसन्नता का आशीर्वाद देती हैं। श्री महाविद्या के पीठों में शामिल इस शक्तिपीठ को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User