प्रयागराज में घोटालों की शिकायत PMO पहुंची:मुख्य सचिव से कार्रवाई और रिपोर्ट तलब, मनरेगा और आवास में गड़बड़ी के आरोप हैं

Oct 09, 2026 - 13:20
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प्रयागराज में घोटालों की शिकायत PMO पहुंची:मुख्य सचिव से कार्रवाई और रिपोर्ट तलब, मनरेगा और आवास में गड़बड़ी के आरोप हैं
प्रयागराज में मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में गड़बड़ियों का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुंच गया है। शिकायतकर्ता दिलीप कुमार प्रजापति के मुताबिक, उनकी शिकायत पर PMO ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। इसमें मामले में उचित कार्रवाई करने, शिकायतकर्ता को जवाब देने और कार्रवाई की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि सैदाबाद ब्लॉक की खेरूवा ग्रामसभा में तालाब की खुदाई और मनरेगा कार्यों में जमकर गड़बड़ी की गई। वो पिछले 1 साल से शिकायतें कर रहे थे, लेकिन विभागीय अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे थे। अब PMO के अनुभाग अधिकारी वैभव पन्नेवाल की ओर से 15 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया। पत्र का पंजीकरण नंबर PMOPG/D/2026/0171451 है। पत्र में शिकायत पर उचित कार्रवाई करने और उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को देने को कहा गया है। कार्रवाई की प्रति PMO के जन शिकायत पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, पत्र जारी होने का अर्थ आरोपों की पुष्टि होना नहीं है। शिकायतों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। जुलाई 2025 से शिकायत करने का दावा भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला मंत्री और खेरूवा निवासी दिलीप प्रजापति का कहना है कि वह जुलाई 2025 से ग्रामसभा में गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने तत्कालीन ग्राम प्रधान वीरेंद्र सिंह और पंचायत सचिव पर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। दिलीप का आरोप है कि सैदाबाद ब्लॉक स्तर पर पहले कराई गई जांच में मौके का ठीक से निरीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने सहायक विकास अधिकारी दयाशंकर पटेल और राकेश यादव की जांच टीमों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच में माप पुस्तिका (MB), तकनीकी मूल्यांकन, मास्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति और बैंक अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए मामले को दबाने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मनरेगा में मशीन से काम कराने का आरोप शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तालाब खुदाई जैसे मनरेगा कार्य मजदूरों के बजाय जेसीबी मशीन से कराए गए। फर्जी जॉब कार्ड और मजदूरों की कथित फर्जी उपस्थिति के जरिए मजदूरी निकालने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने हैंडपंप रीबोर और मरम्मत के नाम पर करीब 7.80 लाख रुपये निकालने का दावा किया है। उनका आरोप है कि संबंधित स्थानों पर हैंडपंप मौजूद नहीं हैं। स्ट्रीट लाइट, पक्की नाली और इंटरलॉकिंग के कामों में पुरानी संरचनाओं को नया दिखाकर भुगतान लेने की शिकायत भी की गई है। आवास, शौचालय और पौधरोपण में भी गड़बड़ी की शिकायत शिकायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपात्र लोगों को लाभ देने और गलत फोटो के जरिए जियोटैगिंग किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि कई जरूरतमंद परिवार अब भी आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत अधूरे शौचालयों को कागजों में पूरा दिखाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके अलावा मिड-डे मील और मियांवाकी पौधरोपण से जुड़े कार्यों में अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है। ब्लॉक से बाहर स्वतंत्र जांच कराने की मांग दिलीप प्रजापति ने मामले की जांच ब्लॉक स्तर से हटाकर किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। उन्होंने खंड विकास अधिकारी (BDO) की भूमिका की जांच कराने की भी मांग उठाई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि स्थलीय निरीक्षण, अभिलेखों की जांच और वीडियोग्राफी के जरिए कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायतकर्ता के आरोपों और PMO के पत्र से संबंधित है। कथित घोटालों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

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