मेडिकल कॉलेज में पूर्व सांसद से धक्का-मुक्की का आरोप:6 बच्चों का पर्चा बनवाने के लिए एक घंटे इंतजार; डिप्टी सीएम से जांच की मांग

Oct 09, 2026 - 13:20
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मेडिकल कॉलेज में पूर्व सांसद से धक्का-मुक्की का आरोप:6 बच्चों का पर्चा बनवाने के लिए एक घंटे इंतजार; डिप्टी सीएम से जांच की मांग
कानपुर देहात के अकबरपुर स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी ने सवाल उठाए हैं। बुधवार सुबह करीब 10 बजे वह भगवान श्री परशुराम वैदिक संस्कृत गुरुकुल के छह बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए लेकर पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य मरीजों की कतार में लगने के बावजूद पर्चा बनवाने के लिए एक घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा। इसी दौरान सुरक्षा गार्ड पर धक्का-मुक्की और उसकी पत्नी पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पूर्व सांसद ने उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर मामले की जांच और मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कराने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भी भेजी गई है। पर्चा काउंटर पर लंबी कतार का आरोप पूर्व सांसद के मुताबिक, वह छह बच्चों के साथ सामान्य मरीजों की कतार में खड़े हुए और एक रुपये का पर्चा बनवाना चाहा। उनका आरोप है कि पर्चा काउंटर पर केवल एक कर्मचारी तैनात था, जिससे लंबी कतार लग गई। महिलाओं के लिए अलग कतार में भी मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा था। पर्चा और टोकन मिलने में देरी से मरीजों को डॉक्टर तक पहुंचने में परेशानी होने की आशंका थी। गार्ड से विवाद के बाद पहुंचे अधिकारी अनिल शुक्ला वारसी ने आरोप लगाया कि इसी दौरान एक सुरक्षा गार्ड ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और गार्ड की पत्नी ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। विवाद बढ़ने पर वह सीढ़ियों पर बैठ गए। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, चिकित्सक, अधिकारी और अकबरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पूर्व सांसद ने संबंधित गार्ड की पहचान कर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टरों की उपस्थिति और दवा स्टॉक पर भी सवाल पूर्व सांसद ने चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड देखने का प्रयास करने की बात कही। उनके अनुसार, इस संबंध में नायब तहसीलदार को भी बुलाया गया था। उन्हें बताया गया कि उपस्थिति वॉइस आधारित ऑनलाइन प्रणाली से दर्ज होती है, लेकिन आरोप है कि संबंधित रिकॉर्ड या प्रिंटआउट उपलब्ध नहीं कराया गया। दवाओं के स्टॉक और वितरण से जुड़े अभिलेख भी स्पष्ट रूप से नहीं दिखाए जाने की बात कही गई। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ चिकित्सक सरकारी ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहकर निजी प्रैक्टिस तो नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बिना जांच किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। डिप्टी सीएम को पत्र लिखकर रखीं मांगें पूर्व सांसद ने पत्र में मेडिकल कॉलेज का बिना पूर्व सूचना निरीक्षण कराने, बायोमेट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा पिछले महीनों की उपस्थिति और वेतन भुगतान का मिलान कराने की मांग की है। उन्होंने डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर, ओपीडी रजिस्टर और मरीजों की संख्या की जांच कराने के साथ दवाओं की खरीद, वितरण और शेष स्टॉक का ऑडिट कराने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा पर्चा-टोकन व्यवस्था में सुधार और कथित धक्का-मुक्की की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराकर जांच कराने की मांग की गई है। पूर्व सांसद ने कहा कि जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित चिकित्सकों, कर्मचारियों या सुरक्षा गार्ड के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

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