प्रयागराज में काली स्वांग के तीसरे दिन उमड़ी भीड़:खप्पर, मुंडमाला और भुजाली संग भक्तों को दिया आशीर्वाद; 200 साल पुरानी परंपरा

Oct 15, 2026 - 13:42
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प्रयागराज में काली स्वांग के तीसरे दिन उमड़ी भीड़:खप्पर, मुंडमाला और भुजाली संग भक्तों को दिया आशीर्वाद; 200 साल पुरानी परंपरा
प्रयागराज के दारागंज में पांच दिवसीय काली स्वांग के तीसरे दिन भी मां काली का स्वरूप धारण किए कलाकार दर्शन देने निकले। शाम होते ही सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों को देखने के लिए लोग देर तक इंतजार करते रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया। 12 अक्टूबर से शुरू हुए इस आयोजन में हर शाम कलाकार मां काली का स्वरूप धारण कर सड़कों पर निकलते हैं। श्रद्धालु दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के छठवें दिन इस आयोजन का समापन होगा। करीब 200 साल पुरानी है काली स्वांग की परंपरा स्थानीय मान्यता के अनुसार, दारागंज में काली स्वांग की परंपरा करीब 200 साल पुरानी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में मां भगवती के काली स्वरूप को पारंपरिक वेशभूषा और अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। मान्यता है कि मां काली स्वयं भक्तों के बीच आकर उन्हें दर्शन देती हैं और आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु देर शाम तक सड़कों पर खड़े होकर कलाकारों के आने का इंतजार करते हैं। कई लोग परिवार के साथ इस परंपरा को देखने पहुंचते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य आकर्षण का केंद्र काली स्वांग में कलाकार का रौद्र रूप, हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और पारंपरिक नृत्य श्रद्धालुओं का ध्यान खींचता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकारों की प्रस्तुति आयोजन को खास बनाती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दर्शन को लेकर उत्साह नजर आता है। स्थानीय लोगों के साथ दूसरे इलाकों से भी श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ काली स्वांग प्रयागराज की लोक संस्कृति की पहचान भी है। पांच दिवसीय आयोजन के अगले दिनों में भी श्रद्धालुओं को मां काली के दर्शन का इंतजार रहेगा।

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