लखनऊ में बांडेड डाक्टरों का प्रदर्शन:सामान्य वेतन की मांग को लेकर सीएम आवास की तरफ बढ़े, ACP ने हाथ जोड़कर खत्म करवाया प्रदर्शन

Oct 15, 2026 - 13:42
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लखनऊ में बांडेड डाक्टरों का प्रदर्शन:सामान्य वेतन की मांग को लेकर सीएम आवास की तरफ बढ़े, ACP ने हाथ जोड़कर खत्म करवाया प्रदर्शन
लखनऊ में गुरुवार को समान वेतन की मांग को लेकर बॉन्डेड डॉक्टरों ने एक बार फिर प्रदर्शन किया। बदन पर एप्रन गले में स्टेथोस्कोप और मुंह पर टेप लगाकर डाक्टर अचानक 1090 पहुंच गए। वहां से मानव श्रृंखला बनाकर सीएम आवास की ओर बढ़ने लगे। मौके पर पुलिस ने पहुंच कर सीएम आवास से पहले ही रोक लिया। प्रदर्शनकारी जब जमीन पर बैठने की कोशिश कर रहे थे तो ACP ने हाथ जोड़कर धरना खत्म करवाया। ‘One Bond One Salary’ बड़ी संख्या में प्रदर्शन करने पहुंचे डाक्टरों के हाथ में तख्ती थी जिस पर लिखा था 'One Bond One Salary बॉन्डेड मेडिकल अधिकारियों को न्याय दो',पुलिस और डॉक्टर में काफी देर तक बहस होती रही।पुलिस के द्वारा डॉक्टर पर बिना अनुमति के प्रदर्शन करने और सड़क जाम करने का आरोप लगाया गया। वहीं डॉक्टरों की ओर से कहा गया कि वह अपने अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम अपना वादा भूल गए हैं और हम 40 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ने किया था मुलाकात प्रदर्शन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड MBBS डॉक्टर कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समान डिग्री, बॉन्ड और सेवा की शर्तें होने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। डॉक्टर वेतन में समानता लागू करने और बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मांगें पूरी करने और 24 घंटे में शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया था। अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। 300 किलोमीटर से प्रदर्शन में प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर अक्षय ने कहा कि हम मिर्जापुर से आए हैं यह हम लोगों के लिए बहुत मुश्किल काम है कि दूसरे जनपद से आना और यहां लखनऊ में आंदोलन करना। 300 किलोमीटर का सफर तय कर कर आते हैं और हमें निराशा हाथ लगती है। डिप्टी सीएम ने 24 घंटे में वादा किया था की मांग पूरी होगी ऐसा नहीं हुआ। हम डॉक्टर हैं हमें सिर्फ भगवान बोला जाता है माना नहीं जा रहा। अगर हमें भगवान माना जाता तो हमारे साथ ऐसा बर्ताव न होता। 50 हजार वेतन, दूसरे डॉक्टरों को 1.10 लाख देवरिया से आई डॉक्टर निदा ने कहा कि मजबूरी में सड़क पर उतरे हैं। बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होती है या 10 लाख रुपए के बॉन्ड की बाध्यता होती है। इस दौरान ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के CHC, PHC समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनाती होती है। इसके बदले उन्हें करीब 50 से 55 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। समान डिग्री, फिर भी वेतन में अंतर डॉक्टरों का दावा है कि समान MBBS डिग्री, बॉन्ड, काउंसलिंग और चयन प्रक्रिया के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन मिल रहा है। इसे वेतन में असमानता बताते हुए प्रदर्शनकारी समान वेतनमान लागू करने और बकाया एरियर देने की मांग कर रहे हैं।

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