प्रयागराज में कसारी-मसारी अब कृष्णपुरी:नाम बदलने के बाद जमीन के रिकॉर्ड से लेकर वोटर लिस्ट और सरकारी बोर्ड तक होंगे अपडेट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी मोहल्ले का नाम बदलकर कृष्णपुरी करने की घोषणा की। इसी इलाके में माफिया अतीक अहमद का घर था। मुख्यमंत्री ने यहां पद्मलोक आवास योजना का भूमि पूजन भी किया। नाम बदलने के बाद अब सरकारी और प्रशासनिक रिकॉर्ड में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। जमीन के दस्तावेजों, नगर निगम के रिकॉर्ड, व्यक्तिगत पहचान पत्रों और पुलिस के डेटाबेस से लेकर सड़क के साइनबोर्ड तक नए नाम के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे। जमीन और संपत्तियों के रिकॉर्ड में होगा संशोधन राजस्व विभाग को क्षेत्र की जमीनों और भूखंडों से जुड़े खसरा-खतौनी रिकॉर्ड में कसारी-मसारी की जगह कृष्णपुरी दर्ज करना होगा। संपत्तियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों और सर्किल रेट सूची में भी नए नाम को शामिल करना पड़ेगा। नगर निगम को हाउस नंबरिंग डेटाबेस, टैक्स रिकॉर्ड और संबंधित रसीदों में नाम अपडेट करना होगा। सरकारी जियो-पोर्टल पर भी बदलाव दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। डिजिटल नक्शों और नेविगेशन प्लेटफॉर्म पर नाम संशोधित कराने के लिए संबंधित एजेंसियों को सूचना भेजनी पड़ सकती है। वोटर लिस्ट से बैंक रिकॉर्ड तक बदल सकता है पता स्थानीय निवासियों को अपने पते से जुड़े दस्तावेजों में नया नाम दर्ज कराना पड़ सकता है। इसके तहत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची और बूथ लेवल डेटाबेस में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज पतों को भी अपडेट करना होगा। बैंक पासबुक, एलआईसी और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में पता बदलवाने की जरूरत पड़ सकती है। डाक विभाग को अपने डेटाबेस में नया नाम दर्ज करना होगा, ताकि पत्रों और पार्सल की डिलीवरी में परेशानी न हो। प्रशासन नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष शिविर या बदलाव की समय-सीमा तय कर सकता है। पुलिस और पासपोर्ट रिकॉर्ड में भी दर्ज होगा नया नाम पुलिस थाने के रिकॉर्ड, अपराध से जुड़े नक्शों और चौकी क्षेत्रों के विवरण में कृष्णपुरी नाम दर्ज करना होगा। पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट कार्यालय के डेटाबेस में भी पते से संबंधित जानकारी को नए नाम के अनुरूप अपडेट करना पड़ेगा। सड़क और सरकारी कार्यालयों के बोर्ड भी बदलेंगे इलाके में लगे दिशासूचक बोर्ड, सरकारी कार्यालयों के बाहर लगे साइनबोर्ड और सार्वजनिक परिवहन के रूट चार्ट पर भी नया नाम लिखना होगा। इसके लिए पुराने नाम वाले बोर्डों को बदलने या संशोधित करने की जरूरत पड़ेगी।
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