प्रयागराज में निकलेगा पजावा का रामदल:पुराने शहर में सजी लाइटें और चौकियां, रावण दहन के साथ सहर में दशहरा उत्सव

Oct 20, 2026 - 06:28
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प्रयागराज में निकलेगा पजावा का रामदल:पुराने शहर में सजी लाइटें और चौकियां, रावण दहन के साथ सहर में दशहरा उत्सव
संगम नगरी में शारदीय नवरात्र के अंतिम दिनों में रामलीला और दशहरा मेले की रौनक अपने चरम पर पहुंच रही है। सोमवार को महानवमी पर पुराने शहर में पजावा रामलीला कमेटी का रामदल और चौक-मुट्ठीगंज क्षेत्र में मेले की तैयारियां प्रमुख आकर्षण हैं। मंगलवार को विजयादशमी पर रावण दहन और दशहरा उत्सव का उल्लास दिखाई देगा। श्रीमहंत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी और श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी की ऐतिहासिक शृंगार चौकियां इस उत्सव की खास पहचान हैं। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के सजे स्वरूपों के दर्शन के लिए हर साल भोर से ही श्रद्धालु पुराने शहर की सड़कों पर पहुंचते हैं। नवमी पर पजावा का रामदल, चौक-मुट्ठीगंज में मेले की रौनक 19 अक्टूबर को महानवमी के अवसर पर प्रयागराज के पुराने शहर में रामदल और मेले से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व है। पजावा रामलीला कमेटी के घोषित दशहरा कार्यक्रम में नवमी और दशमी के रामदल, भरत मिलाप और राजगद्दी जैसे आयोजन शामिल हैं। चौक और मुट्ठीगंज क्षेत्र में रोशनी कमेटियों ने भी सजावट की तैयारी की है। मुट्ठीगंज में 19, 20 और 21 अक्टूबर के लिए विशेष रोशनी की व्यवस्था की गई है। यहां 50 फुट ऊंचे प्रवेश द्वार पर भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों को रोशनी के माध्यम से दिखाने की तैयारी है। शहर में रामदल के दौरान धार्मिक झांकियां, सजे हुए वाहन, बैंड-बाजे और भक्ति गीत माहौल को राममय बनाते हैं। पुराने बाजारों में लोग परिवार के साथ निकलने वाली चौकियों को देखने पहुंचते हैं। दुकानों और रास्तों पर रंगीन रोशनी मेले की रौनक बढ़ाती है। पजावा और पथरचट्टी की चौकियां हैं खास पहचान प्रयागराज की दशहरा परंपरा में श्रीमहंत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी और श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी की भोर की शृंगार चौकियों का विशेष स्थान है। दोनों कमेटियों की चौकियां अलग-अलग स्थानों से निकलकर चौक स्थित घंटाघर के आसपास आमने-सामने आती हैं। राम, लक्ष्मण और सीता के सजे स्वरूपों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। दोनों चौकियां करीब 15 मिनट तक आमने-सामने रहती हैं, फिर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गईं। इस साल चौकियों की सजावट में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी शामिल है। पथरचट्टी की चौकी भगवान विष्णु के कल्कि अवतार पर आधारित थी, जबकि पजावा की चौकी में देश की सात प्रमुख नदियों को दर्शाया गया। दोनों चौकियों में केले के पत्तों और तनों का इस्तेमाल किया गया। प्राकृतिक सामग्री और पारंपरिक कलाकारी ने धार्मिक झांकियों को अलग पहचान दी। दशमी पर विजयादशमी और रावण दहन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का पर्व मनाया जाएगा। रामलीला स्थलों पर रावण वध का मंचन और रावण दहन दशहरा उत्सव के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। श्रद्धालु भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करेंगे और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाले इस पर्व में शामिल होंगे। पजावा और पथरचट्टी की रामलीला परंपरा में रामदल, भरत मिलाप और राजगद्दी भी महत्वपूर्ण आयोजन हैं। हालांकि, इन कार्यक्रमों का सटीक समय और मार्ग कमेटियों की आधिकारिक घोषणा के अनुसार ही प्रकाशित किया जाना चाहिए। दशहरा उत्सव के आगे के चरण में भरत मिलाप और राजगद्दी के आयोजन भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। सुरक्षा और यातायात पर भी रहेगी नजर रामदल और दशहरा मेले में पुराने शहर के चौक, घंटाघर, मुट्ठीगंज और रामलीला स्थलों के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ती है। पुलिस ने नवरात्र और दशहरा आयोजनों को देखते हुए प्रमुख बाजारों, रामलीला स्थलों और पूजा पंडालों में गश्त बढ़ाई है। भीड़ वाले इलाकों में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रयागराज का दस दिवसीय दशहरा उत्सव अपनी भव्य चौकियों और रामलीला परंपरा के लिए जाना जाता है। पजावा और पथरचट्टी की चौकियां इस परंपरा को जीवंत बनाए रखती हैं। नवमी के रामदल से लेकर विजयादशमी के रावण दहन तक शहर में धार्मिक आस्था, कलात्मक सजावट और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

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