प्रयागराज में TGT PGT अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय पहुंचे:छात्र बोले-आमरण अनशन खत्म होने के बाद अब तक लिखित आदेश नहीं, खून से पत्र लिखने की चेतावनी

Oct 06, 2026 - 18:13
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प्रयागराज में TGT PGT अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय पहुंचे:छात्र बोले-आमरण अनशन खत्म होने के बाद अब तक लिखित आदेश नहीं, खून से पत्र लिखने की चेतावनी
प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी (TGT-PGT) भर्ती में पुरानी नियमावली के तहत एक अवसर दिए जाने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र शिक्षा निदेशालय पहुंचे। उन्होंने अपर शिक्षा निदेशक कामता रामपाल से मुलाकात की लेकिन उनकी मांगों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। छात्रों का कहना है कि 22 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में चल रहे छात्रों के आंदोलन और अनशन का संज्ञान लिया था और उन्हें अवसर दिए जाने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी को राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) को पत्र लिखने का निर्देश दिया था ताकि नियमों में एक बार छूट दी जा सके और आंदोलनरत छात्र परीक्षा में शामिल हो सकें। इसके बाद 23 सितंबर को 19 दिनों का आमरण अनशन समाप्त कर दिया गया था, क्योंकि छात्रों को उम्मीद थी कि शासन स्तर से जल्द औपचारिक आदेश जारी किए जाएंगे। लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश नहीं आया है, जिससे छात्रों में निराशा बढ़ रही है। 6 अक्टूबर को प्रतियोगी छात्र फिर से शिक्षा निदेशालय पहुंचे और अपर शिक्षा निदेशक कामता रामपाल से मिले। छात्रों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्णय की मांग की। अपर शिक्षा निदेशक कामता रामपाल ने छात्रों से कहा कि उनके पास अभी तक शासन की ओर से इस संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं इस मामले में निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं और केवल शासन तथा छात्रों के बीच एक माध्यम की भूमिका में हैं। खून से पत्र लिखेंगे छात्र आशुतोष पांडेय ने कहा कि 22 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में चल रहे छात्रों के आंदोलन और अनशन का संज्ञान लिया था तथा छात्रों को अवसर दिए जाने की बात कही गई थी। ऐसे में छात्रों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री के संज्ञान और आश्वासन के बावजूद अब तक शासन स्तर से कोई स्पष्ट आदेश या सूचना शिक्षा विभाग तक क्यों नहीं पहुंची। छात्र लंबे समय से केवल एक अवसर की मांग कर रहे हैं और इस मांग को लेकर 19 दिनों तक अनशन भी किया जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांग पर जल्द स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो छात्रों का आक्रोश और निराशा और बढ़ेगी। उन्होंने छात्रों की अत्यधिक निराशा का उल्लेख करते हुए प्रशासन और शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की तथा कहा कि अगर उनकी बात पर विचार नहीं किया गया तो सभी प्रतियोगी छात्र अपने खून से पत्र लिख कर शासन को भेजेंगे। छात्रों की मुख्य मांगें क्यों किया था आंदोलन? प्रयागराज में 31 अगस्त से प्रतियोगी छात्र पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न से भर्ती परीक्षा कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं चार अभ्यर्थियों ने 19 दिन आमरण अनशन पर भी बैठे थे। छात्रों की मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया में नए नियमों और पात्रता शर्तों का कड़ा विरोध करते हुए पुरानी नियमावली और परीक्षा पैटर्न को लागू हो। नई नियमावली के कारण परीक्षा से वंचित छात्रों को पुरानी नियमावली के तहत एक बार परीक्षा देने का मौका दिया जाए। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) एवं प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के करीब 20-23 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की जाए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द शासन स्तर से लिखित आदेश नहीं आया तो आंदोलन फिर से तेज हो सकता है। 23 सितंबर को आंदोलन इसलिए वापस लिया गया था क्योंकि छात्रों को उम्मीद थी कि औपचारिक नोटिस जल्द जारी होगा, लेकिन अब निराशा बढ़ रही है।

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