पति को सांप से डसवाया,फांसी की सजा मिलते ही बेहोश:मेरठ कोर्ट बोला- प्रेम में अंधी रविता ने अपना सुहाग उजाड़ा; जजमेंट की बड़ी बातें

Oct 17, 2026 - 06:06
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पति को सांप से डसवाया,फांसी की सजा मिलते ही बेहोश:मेरठ कोर्ट बोला- प्रेम में अंधी रविता ने अपना सुहाग उजाड़ा; जजमेंट की बड़ी बातें
“अमित कश्यप की हत्या ने समाज में वैवाहिक जीवन की नींव को हिला दिया। जिस पत्नी रविता के हाथों पति अमित को रक्षा की उम्मीद थी, उसी ने पति की सांसें छीन लीं। यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की निर्मम हत्या है। कलयुगी रविता ने सती सावित्री के आदर्शों को तार-तार किया।” ये बातें मेरठ के ADJ-12 जयवीर सिंह नागर ने अपने जजमेंट में लिखी हैं। उन्होंने आगे लिखा- जिस पति ने विश्वास करके उसे अपने घर की लक्ष्मी बनाया, अपने तीन बच्चों की मां बनाया। उसी पति की गर्दन को पत्नी ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर घोंट दिया। ये अपराध की जघन्यता, क्रूरता है। रविता-अमरदीप दोनों को केवल आजीवन कारावास देना पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए दोनों को मृत्युदंड दिया जाता है। शुक्रवार शाम फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अमरदीप-रविता को कैदियों की बैरक में शिफ्ट किया गया। दोनों बार-बार रो रहे थे। बैरक में खाना भेजा गया, लेकिन दोनों ने छुआ तक नहीं। रविता को तेज बुखार आ गया। जजमेंट में पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर जज ने क्या कहा, कोर्टरूम में दिनभर क्या हुआ, सिलसिलेवार पढ़िए– ‘पति-पत्नी का रिश्ता 7 जन्मों के अटूट संस्कार का’ अपर जिला जज जयवीर सिंह नागर ने कहा- अमित कश्यप की हत्या ने समाज में वैवाहिक जीवन की नींव को हिला दिया। पति-पत्नी का रिश्ता केवल एक दाम्पत्य बंधन नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, समर्पण और 7 जन्मों के अटूट पवित्र संस्कार पर आधारित माना जाता है। शास्त्रों में धर्मपत्नी को अर्धांगिनी की संज्ञा दी गई है। पति-पत्नी एक-दूसरे के जीवन के रक्षक माने जाते हैं। ये केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा पर किया गया गहरा प्रहार है। यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की निर्मम हत्या है। यह समाज को झकझोर देने वाला कृत्य है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में पत्नी को 'अर्धांगिनी' कहा गया है, जिसका अर्थ है पति के शरीर का आधा अंग। पत्नी को 'धर्मपत्नी' इसलिए कहा जाता है कि वह पति के धर्म, कर्म, सुख-दुःख की सहभागी होती है। ‘रविता ने सती सावित्री के आदर्शों को तार-तार कर दिया’ हमारे वेदों, पुराणों में कहा गया है -'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस छीन लिए थे, यही है भारतीय नारी का आदर्श। लेकिन, इस कलयुगी मामले में रविता ने सावित्री के आदर्शों को तार-तार कर दिया। जिस पति को परमेश्वर मानकर पत्नी द्वारा उसकी लंबी उम्र के लिए व्रत रखे जाते हैं। करवाचौथ की पूजा की जाती है। उसी पति का गला घोंटकर पत्नी ने अपने हाथों से अपने सुहाग को उजाड़ दिया। ‘प्रेमी के मोह में अपना सुहाग उजाड़ा’ यह दृश्य अत्यंत हृदयविदारक है कि अमित अपनी अंतिम सांस तक यह सोच भी नहीं पाया होगा कि जो हाथ कभी उसके (अमित) माथे पर प्रेम से फेरा करते थे, वही हाथ आज उसकी सांसों को छीन रहे हैं। समाज में पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास की नींव पर टिका होता है। पति दिनभर मेहनत करके इसलिए निश्चिंत होकर घर में सोता है कि घर में उसकी पत्नी है, जो उसकी रक्षा करेगी। यदि घर की रक्षक ही भक्षक बन जाए और प्रेमी के मोह में अंधी होकर अपने ही पति की हत्या कर दे, तो पूरा समाज असुरक्षित हो जाएगा। ‘अवैध संबंधों के लिए हत्या करना रेयरेस्ट ऑफ द रेयर अपराध’ ऐसे अपराधों से पति-पत्नी के जन्म-जन्मांतर के पवित्र बंधन से लोगों का विश्वास उठता है। ऐसे काम से समाज में अनैतिक संबंधों को बढ़ावा मिलता है। लोग सोचने लगते हैं कि अवैध संबंधों के रास्ते का कांटा बनने वाले पति को हटाया जा सकता है। तीन मासूम बच्चों के सिर से उनके पिता का साया तो उठा ही, साथ ही उनकी मां भी जेल की सलाखों के पीछे चली गई। उन बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया गया, जिसकी एकमात्र दोषी खुद उसकी मां रविता है। यह अपराध रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में आता है। ‘अमित ने भाई माना, अमरदीप ने उसी भरोसे का गला घोंटा’ इस तरह के अपराध में यदि कोर्ट उदारता बरते तो समाज में एक गलत संदेश जाएगा, लोगों का विश्वास उठ जाएगा। आज के समाज में जहां पहले से ही अनैतिक संबंधों के कारण पारिवारिक हत्याओं में बढ़ोतरी हो रही है, वहां ऐसे अपराध को रोकने के लिए कठोर से कठोर दंड दिया जाना जरूरी है। प्रेमी अमरदीप मृतक अमित के घर में आता-जाता था। उसके साथ टाईल्स लगाने का काम करता था। अमित ने ही उसे भाई जैसा विश्वास दिया था, लेकिन उसने उसी विश्वास का गला घोंटा है। अब जानिए कोर्टरूम में क्या हुआ आरोपी पक्ष के वकील खुद नहीं आए, जूनियर को भेजा सुबह 11.30 बजे… ADJ-12 जयवीर सिंह नागर कोर्टरूम में आए। रविता और अमरदीप को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्टरूम में जोड़ा गया। अमरदीप ने सफेद रंग की शर्ट और रविता ने ब्राउन रंग का सूट पहना था। उसने दुपट्‌टे से अपना सिर छिपाया था। जज ने पहले अमरदीप, फिर रविता का नाम लिया। दोनों ने हाथ उठाकर हाजिरी दी। इसके बाद जज ने कहा- अमरदीप-रविता तुम दोनों अमित कश्यप हत्याकांड में दोषी हो। आज इस केस में सजा से पहले की बहस है। जज के सामने अभियोजन पक्ष की वकील एडीजीसी फरजाना खातून, अमित के परिवार की तरफ से किए गए निजी वकील बलराज सिंह खड़े थे। आरोपी पक्ष की तरफ से किए गए निजी वकील ओंकार सिंह भाटी खुद कोर्ट में नहीं आए, बल्कि अपने एक जूनियर वकील को भेज दिया। जज ने तीनों पक्षों को अंतिम दलील देने का आदेश दिया। सबसे पहले एडीजीसी फरजाना ने अपनी दलीलें देते हुए बताया कि अमरदीप, रविता ने जिस जघन्यता के साथ अमित की हत्या की, वह माफी के लायक नहीं है। दोनों ने अमित का गला दबाया, इसके बाद उसके ऊपर कई वार भी किए। जिसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई है। अमित के चेहरे, हाथों और सीने पर खुरचने के तमाम निशान मिले हैं। विवाहिता होकर रविता ने अपने प्रेमी से शादी करने के लिए पति की इस तरह हत्या की, फिर सबूत छिपाने और गुनाह छिपाने के लिए उसके बिस्तर पर सांप छोड़ दिया। ये पूरी तरह सोची समझी, साजिशन हत्या है। इसमें कम से कम मृत्युंदड की सजा दी जाए। पीड़ित पक्ष के वकील बलराज सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट की 5 से अधिक रूलिंग का जिक्र करते हुए अदालत से रविता-अमरदीप के लिए फांसी मांगी। पीड़ित पक्ष और अभियोजन के वकीलों ने बहस खत्म करते हुए एडीजे के सामने निवेदन कर फांसी की मांग उठाई। आरोपी पक्ष के वकील नहीं आए थे, इसलिए बहस यहीं खत्म हो गई। लगभग 20 मिनट तक ये सब चला। रविता बोली- मेरे छोटे 3 बच्चे हैं इसके बाद जज ने अमरदीप और रविता से बारी-बारी सवाल किया। अमरदीप से पूछा- बताओ, तुम्हें मृत्युदंड या आजीवन कारावास क्या दिया जाए? अमरदीप ने कहा- मेरे मां, बाप बुजुर्ग हैं। बस उनका ख्याल रखा जाए। इसी तरह रविता ने कहा- मेरे तीन छोटे बच्चे हैं। उनका ख्याल रखा जाए। मृत्युदंड या आजीवन कारावास, इस सवाल के जबाव में दोनों खामोश हो गए। दोनों का जवाब सुनने के बाद जज ने कहा कि लंच के बाद अदालत केस में अपना फैसला सुनाएगी। फिर जज कुर्सी से उठ गए। जज के फैसला पढ़ते ही रविता-अमरदीप रोने लगे दोपहर 3.05 बजे…मृतक अमित कश्यप की मां मुनेश और भाई सोनू भी कोर्टरूम में मौजूद थे। दोनों एक तरफ कुर्सी पर चुपचाप बैठे थे। अपर जिला जज जयवीर सिंह नागर कोर्टरूम में दाखिल हुए और कुर्सी पर बैठे। जिला जेल से एक बार फिर अमरदीप-रविता को कोर्टरूम से जोड़ा गया। जज ने अमरदीप-रविता दोनों का नाम लेकर उन्हें तलब किया। जैसे ही जज ने फैसला पढ़ना शुरू किया, ऑनलाइन जुड़े अमरदीप-रविता रोने लगे, उनके रोने की आवाज कोर्टरूम में सुनाई देने लगी। जज ने मनुस्मृति के 7वें अध्याय राजधर्म के 22वें श्लोक का हिंदी अनुवाद पढ़ते हुए कहा- दंड के भय से ही यह संपूर्ण जगत नियंत्रण में रहता है। यदि दंड न हो तो दुष्ट व्यक्ति सज्जनों को खा जाएंगें। इसके बाद उन्होंने आत्रेय संहिता के श्लोक क्रमांक 26 का हिंदी अनुवाद पढ़ा- दुष्टों को दंड देना, सज्जन पुरुषों का सम्मान करना, न्यायपूर्वक नीति से राज्य के सम्मान में वृद्धि करना, न्याय मांगने आए लोगों के साथ बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष व्यवहार करना और अपने राष्ट्र की रक्षा करना… ये ही न्याय व्यवस्था के 5 मुख्य गुण माने गए हैं। फांसी की सजा सुनाकर जज ने पेन तोड़ दिया जज ने अमित हत्याकांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शरीर के टुकड़े-टुकड़े करना ही रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि घिनौनी साजिश करके अपने पति को प्रेमी के साथ मिलकर गला दबाकर मारना, फिर सांप डसवाना भी विरलतम है। इसके साथ ही जज ने अपना फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि रविता-अमरदीप दोनों को केवल आजीवन कारावास देना पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए दोनों को मृत्युदंड से दंडित किया जाता है। मृत्युदंड की बात सुनते ही कोर्टरूम तालियों से गूंजने लगा। सामने खड़े वकीलों ने भारत माता की जय के नारे लगाए। यह सुनते ही कुर्सी पर बैठी अमित की मां मुनेश रोने लगीं। उन्होंने जज के सामने हाथ जोड़कर उन्हें धन्यवाद दिया। अमरदीप-रविता मृत्युदंड की सजा सुनकर रोने लगे। जज ने आगे कहा- अमित-रविता के तीनों बच्चों के भरण, पोषण और शिक्षा, देखरेख की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की होगी। जिलाधिकारी तीनों बच्चों के शिक्षा और उनके पालन-पोषण को सही तरह से कराना सुनिश्चित कराएं। इतना कहकर जज ने अपना पेन तोड़ दिया और कुर्सी से उठकर चले गए। लगभग 12 मिनट में जज ने इस सांपकांड में अपना फैसला सुनाया। ------------------------------ ये खबर भी पढ़िए- मेरठ में सांप से डसवाने वाली रविता की लव स्टोरी: दाल-चावल खिलाकर अमरदीप के करीब आई; वीडियो कॉल पर चोट दिखाकर बोली- पति बेरहम है मेरठ में पति की हत्या करके सांप से डसवाने वाली रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। अमित की हत्या से 6 महीने पहले 3 बच्चों की मां रविता की मुलाकात अमरदीप से हुई थी। अमित ने दोस्त अमरदीप को घर पर खाने के लिए बुलाया था। रविता ने अमरदीप को दाल-चावल खिलाया तो उसका दिल रविता पर आ गया। पढ़ें पूरी खबर…

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