पत्नी की मौत के मामले में 6 साल बाद दोषमुक्त:बाराबंकी में 11 महीने जेल में रहा था, मृतका के पिता समेत गवाह आरोपों से मुकर गए

Oct 12, 2026 - 15:33
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पत्नी की मौत के मामले में 6 साल बाद दोषमुक्त:बाराबंकी में 11 महीने जेल में रहा था, मृतका के पिता समेत गवाह आरोपों से मुकर गए
बाराबंकी में पत्नी की आत्महत्या के मामले में करीब 11 महीने जेल में बिताने वाले रामसनेहीघाट क्षेत्र के रामू रावत को छह साल बाद अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश असद अहमद हाशमी की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर रामू को दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे में अहम मोड़ तब आया, जब मृतका के पिता समेत अन्य गवाह अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। रामू रावत (49) पुत्र सतगुरु, रामसनेहीघाट क्षेत्र के करौंधिया मजरे सुनौली गांव का निवासी है। अभियोजन के अनुसार, 16 जुलाई 2020 को उसकी पत्नी रामकली उर्फ रेखा देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच के दौरान महिला का शव फंदे से लटका मिला था। इसके बाद मृतका के पिता माताफेर निवासी टिकरिया, थाना कोठी ने रामू और उसके पिता सतगुरु के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रामू को जेल भेज दिया था। करीब 11 महीने बाद उसे जमानत मिली और वह जेल से बाहर आया। पिता ने कोर्ट में कहा- बेटी को परेशान नहीं करता था रामू मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता माताफेर अपने पूर्व के बयान से मुकर गए। उन्होंने अदालत में कहा कि उनसे तहरीर लिखवाकर अंगूठा लगवा लिया गया था, लेकिन उसमें क्या लिखा था, यह उन्हें पढ़कर नहीं सुनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रामू उनकी बेटी को कभी परेशान नहीं करता था। उनके मुताबिक, बेटी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। मृतका के पिता समेत अन्य गवाह अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने किया दोषमुक्त मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया और रामू को दोषमुक्त करार दिया। अदालत के फैसले से छह साल पुराने मामले में उसे बड़ी राहत मिली। फैसले में साक्ष्यों के मूल्यांकन के महत्व को रेखांकित किया गया। महज कल्पना और अटकलों के आधार पर साक्ष्यों को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। पिता के जेल जाने के बाद परिजनों ने संभाली बच्चों की जिम्मेदारी रामू के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा रमन करीब 17 साल का और छोटा बेटा अमन करीब 15 साल का है। रामू के जेल जाने के बाद दोनों बच्चों की परवरिश परिवार के अन्य सदस्यों ने की। परिवार में रामू का भाई श्यामू समेत अन्य सदस्य हैं। दोनों भाई मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अब अदालत से दोषमुक्त होने के बाद रामू को छह साल पुराने मुकदमे में राहत मिली है।

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