पूर्व संसद बोले जिन्होंने हमें हराया उन्हें मिला सम्मान:हमारा टाटा बाय-बाय कहना स्वाभाविक': भाजपा से बगावत की राह पर पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप

Oct 07, 2026 - 12:39
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पूर्व संसद बोले जिन्होंने हमें हराया उन्हें मिला सम्मान:हमारा टाटा बाय-बाय कहना स्वाभाविक': भाजपा से बगावत की राह पर पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप
रुहेलखंड की सियासत में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। कश्यप समाज के कद्दावर नेता और आंवला से दो बार के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहने का खुला ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर समंदर किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ लिखे गए महज तीन शब्दों—'टाटा बाय-बाय' ने जो सियासी हलचल पैदा की थी, अब उस पर कश्यप के तीखे बयानों ने मुहर लगा दी है। धर्मेंद्र कश्यप के आवास के बाहर समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ है और उनके तेवरों से साफ है कि भाजपा में उनके सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। ‘अपनों के धोखे और पार्टी की अनदेखी से छलका दर्द’ मीडिया से मुखातिब होते हुए धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा के भीतर अपने खिलाफ हुई साजिशों को बेपर्दा किया। बेहद तल्ख लहजे में उन्होंने कहा: "2024 के लोकसभा चुनाव में जिन लोगों ने खुलकर मेरी खिलाफत की, मुझे हराने का काम किया, वे अगर पार्टी की अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे तो निश्चित तौर पर कष्ट होगा। जब ऐसे भीतरघातियों पर पार्टी कोई एक्शन नहीं लेगी, कोई चिंता व्यक्त नहीं करेगी, तो हम जैसे स्वाभिमानी व्यक्ति का 'टाटा बाय-बाय' कहना स्वाभाविक बन जाता है।" शायराना अंदाज में भाजपा को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, "जब से चला हूँ मंज़िल पर मेरी निगाह है, कभी मील का पत्थर नहीं देखा।" जब पत्रकारों ने उनके आवास से भाजपा के बैनर-पोस्टर गायब होने और नई राह चुनने पर सवाल किया, तो उन्होंने दो टूक कहा—"इसे बिल्कुल निश्चित ही मानिए।" सपा में जाने के दिए संकेत, समर्थकों की पंचायत में होगा अंतिम फैसला धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले सियासी कदम को लेकर पत्ते पूरी तरह नहीं खोले, लेकिन इशारों-इशारों में समाजवादी पार्टी में घर वापसी के स्पष्ट संकेत दे दिए। सपा में जाने के सवाल पर मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि अगला ठिकाना क्या होगा, यह बहुत जल्द सबके सामने आ जाएगा। उन्होंने बताया कि आंवला ही नहीं, बल्कि पूरे बरेली मंडल और जनपद में फैले उनके समर्थकों की बड़ी बैठक बुलाई जा रही है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राय के बाद ही नए दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। वहीं अपनी बेटी कीर्ति कश्यप की सक्रिय राजनीति और दातागंज से दावेदारी पर कश्यप ने बेबाक अंदाज में कहा—"टिकट जहां से चाहेंगे, वहां से मिलेगा। पार्टी कोई भी हो, फैसला समर्थकों की बैठक में तय होगा।" राज्यसभा की अनदेखी या भीतरघात की तपिश? उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद से ही कश्यप के बागी तेवर चर्चा में थे। सूची में बरेली क्षेत्र से कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री व झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को जगह दी गई, जबकि 2024 में मामूली अंतर से हारे धर्मेंद्र कश्यप को दरकिनार कर दिया गया। हालांकि कश्यप ने कैमरे पर यह जरूर कहा कि उनका राज्यसभा से कोई खास मतलब नहीं था, लेकिन जानकारों का मानना है कि संगठन में लगातार हो रही उपेक्षा और 2024 की हार के जिम्मेदार नेताओं को तवज्जो मिलने से वह खासे आहत हैं। सोशल मीडिया प्रोफाइल से पार्टी से जुड़ी पहचान हटाने और पीएम मोदी के साथ वाली तस्वीर बदलने की चर्चाओं ने इस अलगाव को और पुख्ता कर दिया है। पंचायत से संसद तक: धर्मेंद्र कश्यप का सियासी रसूख धर्मेंद्र कश्यप रुहेलखंड में गैर-यादव ओबीसी, खासकर कश्यप बिरादरी का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर जमीनी संघर्षों से तय हुआ है: 1995–2000: क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में चुनावी राजनीति की शुरुआत। 2000–2002: जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 2002: बसपा के टिकट पर सन्हा (अब बिथरी चैनपुर) विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। 2003–2007: सत्ता परिवर्तन के बाद सपा में शामिल हुए, दोबारा 2007 में सपा से विधायक बने और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। 2009: सपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से लड़े और मेनका गांधी को कड़ी टक्कर दी (महज 7,681 वोटों से हारे)। 2014: मोदी लहर से पहले भाजपा में शामिल हुए और सपा के कुंवर सर्वराज सिंह को 1.38 लाख से ज्यादा वोटों से हराकर पहली बार सांसद बने। 2019: भाजपा के टिकट पर 1.13 लाख से अधिक वोटों के अंतर से बसपा की रुचि वीरा को हराकर दोबारा लोकसभा पहुंचे। 2024: भाजपा ने तीसरी बार उतारा, लेकिन भीतरघात और कड़े मुकाबले में सपा के नीरज मौर्य से 15,969 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। एक नजर में: प्रोफाइल नाम: धर्मेंद्र कुमार कश्यप जन्म: 1 जून 1968 (कांधरपुर, बरेली) शिक्षा व पेशा: 10वीं पास, कृषि पारिवारिक पृष्ठभूमि: पिता महेंद्र पाल कश्यप, माता कुमार दाई कश्यप, पत्नी सरोज कश्यप सियासी पहचान: पूर्व मंत्री (उत्तर प्रदेश), दो बार लोकसभा सांसद (आंवला) धर्मेंद्र कश्यप का भाजपा से मोहभंग होना केवल एक पूर्व सांसद का पार्टी छोड़ना नहीं है, बल्कि रुहेलखंड के पूरे कश्यप वोटबैंक के खिसकने की आहट है। अगर कश्यप दोबारा साइकिल की सवारी करते हैं, तो बरेली और बदायूं के सियासी समीकरणों में भाजपा के लिए एक बड़ा चुनावी नुकसान तय माना जा रहा है।

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