QR कोड को काले कपड़े से ढककर मनाया'नो UPI डे':MDR के विरोध में पटेल चौक पर व्यापारियों ने किया विरोध प्रदर्शन
बरेली। गांधी जयंती पर पटेल चौक पर व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित/लागू MDR के विरोध में अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के आह्वान पर व्यापारियों ने सांकेतिक रूप से ‘नो UPI डे’ मनाया। इस दौरान दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड पर काला कपड़ा डालकर विरोध जताया। व्यापारियों ने हाथों में ‘नो UPI डे’ के पर्चे लेकर नारेबाजी की और प्रदर्शन के दौरान यूपीआई बारकोड को सांकेतिक रूप से जलाकर भी विरोध दर्ज कराया। व्यापारियों ने दुकानदारों और ग्राहकों से 2 अक्टूबर को यूपीआई के बजाय नकद भुगतान करने की अपील की। उनका कहना था कि यूपीआई रोजमर्रा के कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन बड़े मूल्य के कुछ लेनदेन पर MDR लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ने की चिंता है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी यूपीआई व्यवस्था बंद करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि MDR का विरोध कर रहे हैं। कारोबार जारी रहेगा और जरूरत के अनुसार आरटीजीएस, चेक व अन्य भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। सतीश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि ऑनलाइन कारोबार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच व्यापारियों का मार्जिन पहले ही प्रभावित है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क से छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। आलोक अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी पहले भी सरकार को पत्र भेज चुके हैं। शुल्क वापस नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। वही केंद्र सरकार के 15 सितंबर 2026 के स्पष्टीकरण के अनुसार P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच यूपीआई भुगतान पर MDR नहीं है। ₹2 हजार तक के P2M भुगतान और निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी शुल्क मुक्त हैं। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। वही निर्धारित ₹2 हजार से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू है। सरकार के अनुसार यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता, बल्कि भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों के बीच वितरित होता है।
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