SIR विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- ‘बचने वाले नहीं हो’

एसआईआर को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ गया है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मतों की चोरी देश के लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला है। वहीं चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि एसआईआर समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

Sep 23, 2026 - 13:38
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SIR विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- ‘बचने वाले नहीं हो’

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद तेज हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की। चुनाव आयोग ने इन दावों पर सफाई देते हुए कहा कि एसआईआर समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतों की कथित चोरी देश के लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला है। राहुल गांधी ने कहा कि समय आने पर जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा और वे बच नहीं पाएंगे।

SIR विवाद के बीच राहुल गांधी का बड़ा हमला

एसआईआर को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कई बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता आंकड़ों के प्रबंधन जैसे विषयों से बताया गया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी सामने आई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों के बावजूद सभी अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर क्या कहा

राहुल गांधी ने एसआईआर विवाद पर एक वीडियो साझा करते हुए चुनाव आयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतों की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है और इसे संविधान पर सीधा हमला बताया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस और चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक वक्तव्य के रूप में सामने आए हैं। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो किया जा रहा है वह गलत है। उन्होंने आगे कहा कि समय आने पर जिम्मेदार लोगों को पकड़ा जाएगा और वे बच नहीं पाएंगे। उनके इस बयान के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।

14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद उस रिपोर्ट के बाद बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आपत्तियां मतदाता सूची में नाम हटाने, नए मतदाताओं को जोड़ने और मतदाता आंकड़ों के प्रबंधन से संबंधित थीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के नाम पर जारी किए गए फैसलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन दावों के बाद चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

चुनाव आयोग ने दावों पर दी सफाई

चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने रिपोर्ट के बाद कहा कि आयोग में किसी विषय पर अलग-अलग विचार सामने आना संभव है, लेकिन अंतिम निर्णय चर्चा के बाद लिए जाते हैं। आयोग के अनुसार एसआईआर समेत सभी फैसलों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ विषयों पर सवाल या चिंताएं उठाई गई हों, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अंतिम निर्णय एकतरफा तरीके से लिया गया। चुनाव आयोग ने अपने सभी निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

मतदाता सूची को लेकर क्या है विवाद

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों की जांच और पुनरीक्षण से जुड़ा है। इसी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राज्यों में मतदाताओं के नाम, पंजीकरण और पुराने मतदाता आंकड़ों को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के संदर्भ में मतदाता नाम हटाने और आंकड़ों के प्रबंधन जैसे विषयों का उल्लेख किया गया है। इस पूरे मामले में एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग अपने फैसलों को नियमों के तहत और सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। ऐसे में एसआईआर से संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक प्रक्रियाओं की स्थिति आगे इस विवाद को समझने में महत्वपूर्ण होगी।

विपक्ष ने की मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग

राहुल गांधी के अलावा कई विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज हुई हैं, तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी की है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से जारी सफाई में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। इसलिए इस समय विवाद का मुख्य केंद्र एक ओर रिपोर्ट में बताए गए आपत्तियों के दावे और दूसरी ओर चुनाव आयोग की सर्वसम्मति वाली सफाई है।

आगे बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

एसआईआर को लेकर सामने आए दावों के बाद विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे को मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने निर्णयों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया गया बता रहा है। अब इस मामले में रिपोर्ट में बताए गए आपत्तियों की वास्तविक प्रकृति, आयोग के आधिकारिक दस्तावेज और एसआईआर से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इन तथ्यों के आधार पर ही विवाद के अलग-अलग दावों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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