राहुल गांधी के खिलाफ हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित:सिखों के खिलाफ विवादित बयान का मामला, राहुल पर FIR की मांग
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका सुनवाई पूरी कर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। यह मामला सिखों के खिलाफ विवादित टिप्पणी का है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने दो घंटे तक बहस और दलीलें पेश कीं। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा व अन्य की तरफ से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा। राहुल गांधी के खिलाफ BNSS की धारा 528 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। यचिका में राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है। वाराणसी कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा व अन्य ने फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित किया है। क्या है मामला जानिये सिखों को लेकर राहुल गांधी के भड़काऊ बयान के मामले में वाराणसी की अदालत से निगरानी 121 खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी।
अर्जी के अनुसार, राहुल गांधी ने सितम्बर 2024 में अमेरिकी यात्रा के दौरान सिखों को लेकर भड़काऊ बयान दिया था जिसके विरुद्ध वाराणसी के नागेश्वर मिश्र ने एसीजेएम चतुर्थ के न्यायालय में प्रकीर्ण वाद प्रस्तुत किया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने उस प्रकीर्ण वाद को 18 नवम्बर 2024 को खारिज कर दिया जिसके विरुद्ध नागेश्वर मिश्र ने अपर सत्र न्यायाधीश पंचम वाराणसी के न्यायालय में निगरानी दाखिल की, जिसमें राहुल गांधी को नोटिस जारी हुआ। राहुल गांधी ने अधिवक्ता के माध्यम से आपत्ति दाखिल की। अपर सत्र न्यायाधीश यजुर्वेद विक्रम सिंह ने नागेश्वर मिश्र की निगरानी 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर ली, जिसके विरुद्ध राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में अपील की, जो खारिज हो गई। परिणाम स्वरूप पुनः एसीजेएम चतुर्थ वाराणसी के यहां सुनवाई हुई। एसीजेएम नीरज त्रिपाठी ने पुनः यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घटना का समय और तिथि-नहीं दी गई है। नागेश्वर मिश्र ने पुनः एडीजे पंचम के यहां निगरानी दाखिल की।
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