सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई, सीजेआई का बड़ा बयान!
राहुल गांधी समेत विपक्ष के 13 नेताओं की विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को कोई धमका नहीं सकता। सुनवाई में दिल्ली प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, महिला पत्रकारों की सुरक्षा और जंतर-मंतर से जुड़े मामले भी उठे।
दिराइजिंगन्यूज | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के 13 नेताओं ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। इसके साथ ही 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर भी अदालत में दलीलें रखी गईं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को कोई धमका नहीं सकता।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- अदालत को कोई धमका नहीं सकता
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई घटनाओं से वकील आहत हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 200 वकीलों ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को पत्र लिखा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आश्वस्त रहें, अदालत को कोई धमका नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि लोग बाहर कुछ और कहते हैं, लेकिन अदालत में आने पर उनकी भाषा बदल जाती है।
राहुल गांधी के अदालत पहुंचने के दौरान बनी स्थिति पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका पर नोटिस जारी किया जा रहा है, लेकिन एक याचिकाकर्ता को अपने आचरण के संबंध में सफाई देनी होगी। यह टिप्पणी राहुल गांधी के अदालत पहुंचने के दिन बनी स्थिति के संदर्भ में बताई गई है। इस मामले में अदालत विभिन्न याचिकाओं और घटनाओं से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान अलग-अलग पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं।
प्रदर्शन और राजनीतिक मार्च की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि अदालत परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया। उन्होंने संबंधित घटनाओं की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। इस पर अदालत ने प्रदर्शन, राजनीतिक मार्च और उनसे जुड़ी घटनाओं की सभी संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया। इससे मामले की जांच और घटनाक्रम को समझने के लिए उपलब्ध दृश्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का रास्ता खुलेगा।
महिला पत्रकारों के साथ कथित पुलिस उत्पीड़न का मामला उठा
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सुनवाई के दौरान महिला पत्रकारों को पुलिस कार्रवाई के कारण हुई परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि एक महिला पत्रकार ने पुलिस उत्पीड़न की शिकायत की थी। उनके अनुसार, शिकायत के बाद संबंधित महिला पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज कराया गया। उन्होंने महिला पत्रकार को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने और महिला पत्रकारों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक समिति गठित करने की मांग की।
महिला पत्रकार के खिलाफ प्राथमिकी का मुद्दा भी अदालत में उठा
सुनवाई में अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने आरोप लगाया कि सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने अदालत से महिला पत्रकार को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने का अनुरोध किया। इस मामले में पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सुनवाई का हिस्सा बने। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध समाचार सामग्री में नहीं दी गई है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का मामला
सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का मुद्दा भी उठाया गया। एक अधिवक्ता ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि यह कदम अदालत के आदेश के बाद उठाया गया था। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नहीं लिया गया था, बल्कि संबंधित समिति इस विषय पर पहले से विचार कर रही थी। इसके बाद अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
प्रदर्शन का आह्वान करने वाले संगठनों की जवाबदेही पर बहस
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि एक याचिकाकर्ता ने मांग की है कि प्रदर्शन का आह्वान करने वाले संगठन को उससे उत्पन्न परिस्थितियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। इस पर अदालत ने संबंधित याचिका पर भी नोटिस जारी करने की बात कही। यह मामला विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन और उनके परिणामों की जिम्मेदारी से जुड़ा है। अब इस विषय पर सरकार का पक्ष और संबंधित पक्षों की दलीलें आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण होंगी।
केंद्र सरकार ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया
10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित मामलों की सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अवमानना संबंधी नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी की बात को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, मानो सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली हो। सरकार का कहना था कि संबंधित कदम परिस्थितियों के अनुसार उठाए गए थे। अदालत में इस मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं।
केंद्रीय गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त और स्पष्ट माफी मांगी है। उपलब्ध समाचार के अनुसार, गृह सचिव ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस से 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित करने का अनुरोध मिला था। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा रोकने के उद्देश्य से पुलिस का यह अनुरोध उचित था। इस मामले में अदालत के निर्देशों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े सवालों पर विचार किया जा रहा है।
राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिका
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों के 13 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इनमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सौगत राय, संजय राउत, एमए बेबी, डी राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले, ईटी मोहम्मद बशीर, टी थिरुमावलवन और सज्जाद अहमद किचलू शामिल हैं। याचिका में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विवादित निर्णयों की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की गई है।
विशेष गहन पुनरीक्षण के फैसलों की जांच की मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विवादित निर्णयों की पूरी फाइलें, बैठक के कार्यवृत्त, संबंधित टिप्पणियां और निर्वाचन आयुक्तों की दर्ज आपत्तियां अदालत के सामने रखी जाएं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लिए जाने की जांच की मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि कोई निर्णय कानूनी अधिकार के बिना लिया गया है, तो उसे रद्द किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में लगभग 33 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, यह आरोप है और इस पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने संकेत दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामलों पर राज्यवार विचार किया जा सकता है, न कि सभी मामलों को एक साथ सुनकर उनका निपटारा किया जाए।
दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में रखी अपनी दलील
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि अदालत के निर्देशों के तहत किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवर लोगों को अपना काम करने से नहीं रोका गया। हलफनामे के अनुसार, कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई जिन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन किया था। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का उल्लेख
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में पहले हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, जुलाई में हुए मार्च के दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में 6, 7 और 8 तारीख को हुए प्रदर्शनों के दौरान मध्य दिल्ली में यातायात बाधित हुआ और 12 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। ये विवरण पुलिस की ओर से अदालत में रखे गए पक्ष का हिस्सा हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और कनॉट प्लेस को लेकर अलग याचिका
दिल्ली में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर एक अलग याचिका भी सामने आई है। इसमें आशंका जताई गई कि दशहरे के सप्ताहांत में कनॉट प्लेस में प्रदर्शन होने से लोगों को परेशानी हो सकती है और क्षेत्र का सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में संबंधित जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के साथ पक्ष रखने को कहा है। समाचार के अनुसार, 16 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई किए जाने पर सहमति बनी थी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पार्टी भी आंदोलन में शामिल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग से जुड़े आंदोलन में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम पहली बार शामिल हुई। समाचार के अनुसार, विजय की पार्टी तमिलनाडु में कांग्रेस के सहयोग से सरकार चला रही है। अब तक विशेष गहन पुनरीक्षण के विवाद से दूरी बनाए रखने को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम उसकी आलोचना कर रही थी। इस घटनाक्रम से मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर विपक्षी राजनीति में बढ़ती सक्रियता का संकेत मिलता है।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण, विपक्षी नेताओं की याचिकाओं, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मामलों पर सुनवाई जारी है। अदालत ने कुछ याचिकाओं पर नोटिस जारी किए हैं और सरकार से जवाब मांगा है। अब संबंधित पक्षों के जवाब तथा आगे होने वाली सुनवाई के आधार पर मामले की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में इन याचिकाओं पर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
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