राहुल पर फैसला सुरक्षित- क्या बोले जिरह करने वाले वकील:सिखों पर बयान : दो घंटे चली बहस, अधिवक्ता ने कहा FIR की मांग

Oct 17, 2026 - 08:35
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राहुल पर फैसला सुरक्षित- क्या बोले जिरह करने वाले वकील:सिखों पर बयान : दो घंटे चली बहस, अधिवक्ता ने कहा FIR की मांग
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका सुनवाई पूरी कर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। यह मामला सिखों के खिलाफ विवादित टिप्पणी का है। अब हाईकोर्ट के फैसले से तय होगा कि राहुल गांधी पर आगे यह मामला चलेगा या खारिज कर दिया जाएगा। मामले में याचिकाकर्ता के वकील सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट में जिरह और बहस करते हुए राहुल गांधी पर एफआईआर की मांग की। जानिये याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें एडवोकेट हाईकोर्ट सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि राहुल गांधी अमेरिका में बोले थे कि भारत में सिखों को कड़ा पहनने की इजाजत नहीं। पगड़ी बांधने की इजाजत नहीं, गुरुद्वारा नहीं जा सकते। उनके बयान की सराहना खालिस्तानी समर्थकों ने की थी। इस पर सीधे सीधे राहुल गांधी को दंडित होना चाहिए था। सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए थी जो कि नहीं की गई। नागेंश्वर मिश्र की तरफ से याचिका हुई। इसमें जिरह और बहस पूरी हो गई। अधिवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी को सोचना चाहिए आप विपक्ष के नेता हैं, संवैधानिक पद पर हैं। ये तो देशद्रोह है न। इसी आधार पर राहुल गांधी पर FIR और कार्रवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट से तय होगा आगे चलेगा केस या मामला खारिज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी की। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला सिखों के खिलाफ विवादित टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने दो घंटे तक बहस और दलीलें पेश कीं। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा व अन्य की तरफ से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा। राहुल गांधी के खिलाफ BNSS की धारा 528 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। यचिका में राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है। वाराणसी कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा व अन्य ने फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित किया है। दरअसल, साल 2024 में अमेरिका दौरे पर राहुल गांधी ने कहा था- लड़ाई इस बात की है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी और कड़ा पहनने का अधिकार है। राहुल के इस बयान के खिलाफ नागेश्वर मिश्रा ने याचिका दायर की है। राहुल के जिस बयान पर विवाद, उसे हूबहू पढ़िए... राहुल ने कहा था- सिखों को चिंता है कि क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे 10 सितंबर, 2024 को अमेरिका में राहुल ने कहा था- भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात की चिंता है कि उन्हें पगड़ी, कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी या नहीं? क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे? ये चिंता सिर्फ सिखों की नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है। देश सबका है, यह BJP नहीं मानती। भारत एक संघ है। संविधान में साफ लिखा है। भारत एक संघ राज्य है, जिसमें विभिन्न इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शामिल हैं। BJP कहती है कि ये संघ नहीं है, ये अलग है। RSS भारत को नहीं समझती। RSS कहती है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं। कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से, कुछ समुदाय दूसरे समुदाय से कम हैं। हर राज्य का अपना इतिहास, परंपरा है। RSS की विचारधारा में तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी हैं, ये कमतर भाषाएं हैं। इसी बात पर लड़ाई है। RSS भारत को नहीं समझती। जानिए पूरा मामला वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने राहुल के बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में FIR दर्ज कराने के लिए शिकायत दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई। इस पर उन्होंने अदालत में केस दाखिल किया। मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है। यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने एमपी/एमएलए कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की। जिसे 21 जुलाई 2025 को अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जो खारिज हो गई। परिणाम स्वरूप पुनः एसीजेएम चतुर्थ वाराणसी के यहां सुनवाई हुई। एसीजेएम नीरज त्रिपाठी ने पुनः यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घटना का समय और तिथि-नहीं दी गई है। इसके बाद नागेश्वर मिश्र ने पुनः एडीजे पंचम के यहां निगरानी दाखिल की। MP/MLA कोर्ट में लिखित जवाब दे चुके हैं राहुल गांधी राहुल गांधी ने 25 अगस्त को एमपी/एमएलए कोर्ट के समक्ष दायर लिखित जवाब दाखिल किया था। कहा था- नागेश्वर मिश्रा द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका राजनीति से प्रेरित है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने खुद को 'सच्चा देशभक्त' बताते हुए कहा- सिख समुदाय सहित सभी धर्मों और समुदायों के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है। उनकी टिप्पणी वास्तव में "सिख समुदाय के हित में और उनके योगदान को उजागर करने के लिए" थी। राहुल गांधी ने तर्क दिया था- अमेरिका यात्रा के दौरान दिया गया बयान विशेष समुदाय (सिखों) पर पूरे विश्व में हो रहे अत्याचारों के संबंध में है, जो सिख समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सिख समुदाय के सम्मान और उनके हित में दिया गया। बयान भारत के बाहर दिया गया, इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे सिख समुदाय का अपमान हुआ हो। या उक्त समुदाय के किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंची हो। राहुल ने लिखा कि उनके खिलाफ कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता। भारत के बाहर किए गए कथित अपराध के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 208 में यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना भारत में ऐसे किसी अपराध की जांच या सुनवाई नहीं की जा सकती।

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