रामनगरी आए अखिलेश, रामलला के दर्शन से बनाई दूरी:भाजपा ने साधा निशाना, विधायक वेद प्रकाश बोले- राममंदिर से दूरी अयोध्या के प्रति सोच दर्शाती है

Oct 09, 2026 - 08:18
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रामनगरी आए अखिलेश, रामलला के दर्शन से बनाई दूरी:भाजपा ने साधा निशाना, विधायक वेद प्रकाश बोले- राममंदिर से दूरी अयोध्या के प्रति सोच दर्शाती है
श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने गुरुवार को अयोध्या पहुंचे सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रामलला के दर्शन नहीं करने पर सियासत गरमा गई। भाजपा नेताओं ने इसे अयोध्या की आस्था से दूरी बताते हुए निशाना साधा। अखिलेश पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के यहां आयोजित कथा में शामिल होने पहुंचे थे। उनके निर्धारित कार्यक्रम में राममंदिर दर्शन शामिल नहीं था। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि रामनगरी आने के बावजूद रामलला के दर्शन नहीं करना अखिलेश यादव की अयोध्या के प्रति सोच को दर्शाता है। जिस राममंदिर के लिए करोड़ों रामभक्तों ने संघर्ष किया, वहां जाने से परहेज करना केवल मंदिर से दूरी नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था से दूरी का संदेश देता है। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि रामसेवकों पर गोली चलवाने वाली राजनीति को अयोध्या का विकास और राममंदिर का वैभव आज भी स्वीकार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या विश्व की आस्था का केंद्र बन रही है, लेकिन कुछ लोगों को बदलती अयोध्या के बजाय पुराने राजनीतिक समीकरण ही दिखाई देते हैं। लल्लू सिंह बोले- जनता भूली नहीं संघर्ष का इतिहास पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि राममंदिर का निर्माण करोड़ों रामभक्तों की आस्था और लंबे संघर्ष का परिणाम है। रामसेवकों पर गोली चलवाने वालों की राजनीति का अध्याय अयोध्या की जनता भूली नहीं है। उन्होंने रामलला के दर्शन से दूरी बनाने को अयोध्या की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि अखिलेश यादव कथा सुनने अयोध्या आए, लेकिन रामलला के दरबार तक जाने का साहस नहीं जुटा पाए। जनता देख रही है कि कौन अयोध्या की आस्था के साथ खड़ा है और कौन राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अयोध्या को देखता है। भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या की जनता रामसेवकों पर गोली चलने की घटना को भूली नहीं है। आज अयोध्या भव्य राममंदिर के साथ विकास की नई पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को अपने पुराने राजनीतिक फैसलों का प्रायश्चित करना है, तो उसे रामलला के दरबार में जाकर माथा टेकना चाहिए। इस बीच, कथा के आयोजक और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने भी टिप्पणी की थी कि जिसे अपनी बुद्धि शुद्ध करानी हो, वह कथा में आ सकता है। अखिलेश यादव के दौरे और राममंदिर दर्शन नहीं करने को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों से जिले में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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