रायबरेली में AIIMS मार्ग पर नो-एंट्री बेअसर:दिन-रात दौड़ रहे भारी वाहन, हादसे का मंडरा रहा खतरा
रायबरेली जिले के मुंशीगंज स्थित एम्स (AIIMS) मार्ग पर नो-एंट्री के नियमों और प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अत्यंत संवेदनशील मार्ग होने के बावजूद दिन-रात बड़े और भारी वाहनों का बेरोक-टोक आवागमन जारी है, जिससे आम जनता, मरीजों और राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। उल्लेखनीय है कि लगभग 6 महीने पहले ही एम्स प्रशासन ने रायबरेली जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मुंशीगंज-डलमऊ बाईपास व एम्स मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी। एम्स प्रशासन ने अपने पत्र में स्पष्ट चेताया था कि भारी वाहनों के कारण मार्ग पर गंभीर हादसे और जाम की स्थिति बनी रहती है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) सरनीत कौर ब्रोका ने निर्देश जारी किए थे कि यह मार्ग बेहद संवेदनशील है, इसलिए यहां से भारी वाहनों की आवाजाही न कराई जाए। प्रशासनिक आदेशों और एम्स प्रशासन की लिखित अपीलों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का सीधा आरोप है कि नो-एंट्री प्वाइंट्स पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड के जवान कथित 'लेन-देन' (सुविधा शुल्क) के चक्कर में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बड़े-बड़े ट्रकों और डंपरों को मार्ग से गुजरने की हरी झंडी दे देते हैं। भारी वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश के कारण इस मार्ग पर आए दिन भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सबसे दुखद स्थिति यह है कि एम्स अस्पताल आने-जाने वाली आपातकालीन एंबुलेंस गाड़ियां घंटों इस जाम में फंसी रहती हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। निर्दोष राहगीर व स्थानीय लोग घायल इसके अतिरिक्त, ओवरलोडेड भारी ट्रकों के अचानक टायर फटने की घटनाओं में कई बार निर्दोष राहगीर व स्थानीय लोग घायल भी हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने इस भ्रष्टाचार और लापरवाही पर जल्द सख्त कदम नहीं उठाया, तो एम्स मार्ग पर कभी भी कोई बड़ा और भयानक हादसा हो सकता है।
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