आरबीआई ने बढ़ाई रेपो दर, अब कितनी महंगी होगी आपकी ईएमआई
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से परिवर्ती ब्याज दर वाले गृह ऋण, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण महंगे हो सकते हैं। 50 लाख रुपये के 20 वर्ष के गृह ऋण पर ब्याज दर 7.50 से बढ़कर 7.75 प्रतिशत होने पर मासिक किस्त करीब 777 रुपये बढ़ सकती है। वहीं, सावधि जमा करने वाले ग्राहकों को बढ़ी हुई ब्याज दरों का लाभ मिलने की संभावना है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 7 अक्टूबर 2026
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। लगभग चार साल बाद हुई इस बढ़ोतरी से बैंकों की ऋण लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर परिवर्ती ब्याज दर वाले गृह, वाहन और व्यक्तिगत ऋण की मासिक किस्तों पर पड़ने की संभावना है। वहीं, सावधि जमा करने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज मिलने का लाभ मिल सकता है।
रेपो दर पर आरबीआई का बड़ा फैसला
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चली। इस बैठक में केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में 25 आधार अंक यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया। इसके बाद रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और खाद्य पदार्थों की महंगाई सहित वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को फैसले के प्रमुख कारणों में माना गया है।
पहले कब बढ़ाई गई थी रेपो दर
भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो दर में बढ़ोतरी की थी। उस समय 25 आधार अंक की वृद्धि के बाद रेपो दर 6.50 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद लंबे समय तक इसे ऊंचे स्तर पर स्थिर रखा गया। वर्ष 2025 में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों में सुधार के बीच केंद्रीय बैंक ने कई चरणों में दरों में कटौती की, जिससे यह घटकर 5.25 प्रतिशत रह गई थी।
वर्ष 2025 में कितनी बार रेपो दर घटी
वर्ष 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में कुल चार बार कटौती की थी। फरवरी में 25 आधार अंक की कटौती के बाद दर 6.25 प्रतिशत हुई, जबकि अप्रैल में इसे घटाकर 6 प्रतिशत किया गया। जून में 50 आधार अंक की बड़ी कटौती के बाद रेपो दर 5.50 प्रतिशत पर आ गई। दिसंबर 2025 में 25 आधार अंक की एक और कटौती के बाद यह 5.25 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी।
रेपो दर बढ़ने से ऋण क्यों महंगा होगा
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को धन उपलब्ध कराता है। जब केंद्रीय बैंक इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर बैंकों की ऋण ब्याज दरों पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में गृह ऋण, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण लेने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
परिवर्ती ब्याज दर वाले ग्राहकों पर ज्यादा असर
जिन लोगों ने परिवर्ती ब्याज दर पर ऋण लिया है, उनकी मासिक किस्त पर इस फैसले का असर पड़ सकता है। बैंक ब्याज दर बढ़ने के बाद ऋण की मासिक किस्त बढ़ा सकते हैं या ऋण चुकाने की अवधि को लंबा कर सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर संबंधित बैंक की ब्याज दर और ऋण की शर्तों पर निर्भर करेगा। स्थिर ब्याज दर वाले ऋण ग्राहकों पर तत्काल सीधा असर पड़ने की संभावना कम है।
सावधि जमा करने वालों को मिल सकता है फायदा
रेपो दर में बढ़ोतरी का असर केवल ऋण लेने वालों पर ही नहीं पड़ता है। बैंक अपनी जमा योजनाओं की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में सावधि जमा करने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक ब्याज मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, हर बैंक द्वारा ब्याज दर में की जाने वाली बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है।
50 लाख रुपये के गृह ऋण पर कितनी बढ़ सकती है ईएमआई
यदि 50 लाख रुपये के गृह ऋण पर ब्याज दर 7.50 प्रतिशत से बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो जाती है, तो मासिक किस्त में बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर 20 वर्ष की अवधि वाले 50 लाख रुपये के ऋण पर पहले लगभग 40,280 रुपये की मासिक किस्त बनती थी। ब्याज दर 7.75 प्रतिशत होने पर यह करीब 41,057 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी मासिक किस्त में लगभग 777 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
कुल मिलाकर क्या पड़ेगा असर
रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर हर ग्राहक पर एक जैसा नहीं होगा। ऋण की राशि, ब्याज दर, बची हुई अवधि और बैंक की नई दर के आधार पर मासिक किस्त में बदलाव अलग-अलग हो सकता है। परिवर्ती ब्याज दर वाले ऋण ग्राहकों को अपनी मासिक किस्त और ऋण अवधि पर नजर रखनी चाहिए। दूसरी ओर, सावधि जमा करने वालों के लिए बढ़ती ब्याज दरें कुछ राहत दे सकती हैं।
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