रेजीनगर उपचुनाव में ममता बनर्जी को झटका
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी के गुट को बड़ा झटका लगा है। रेजीनगर से उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने 19 सितंबर को अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे एक दिन पहले नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे भी चुनावी मैदान से हट गई थीं। अब दोनों सीटों पर ममता गुट का कोई उम्मीदवार नहीं है।
दि राइजिंग न्यूज़ | पश्चिम बंगाल | 19 सितंबर 2026
रेजीनगर से रबीउल आलम ने वापस लिया नामांकन
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट की ओर से उम्मीदवार बनाए गए रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी और इसी दिन उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया। उनके नाम वापस लेने के बाद इस सीट पर ममता बनर्जी के गुट का उम्मीदवार नहीं रहेगा।
नए चुनाव चिह्न को लेकर बताई वजह
रबीउल आलम चौधरी के नाम वापस लेने की वजह को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में जानकारी सामने आई है। बंगाली समाचार माध्यमों के अनुसार, उन्होंने नए चुनाव चिह्न को मतदाताओं तक पहुंचाने और कम समय में कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में सक्रिय करने में कठिनाई का हवाला दिया। चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी के गुट को नया नाम और नया चुनाव चिह्न मिला था, जिसके कारण प्रचार की तैयारी को लेकर चुनौती सामने आई।
नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी उम्मीदवार मैदान से बाहर
रेजीनगर से पहले नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। उन्होंने नामांकन वापस लेने से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने चुनावी मुकाबले से हटने का फैसला किया, जिससे नंदीग्राम में ममता गुट का उम्मीदवार मैदान से बाहर हो गया।
दोनों सीटों पर ममता गुट के उम्मीदवार नहीं
रबीउल आलम चौधरी के नाम वापस लेने के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों विधानसभा सीटों पर ममता बनर्जी के गुट का कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ रहा है। पश्चिम बंगाल की इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मुकाबले में बचे उम्मीदवारों के बीच चुनावी गतिविधियां तेज होंगी।
रेजीनगर में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार
रेजीनगर सीट पर कांग्रेस की ओर से मोहम्मद अब्दुल्लाह को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने अधिवक्ता सईद असद अली को मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट से शंखारव सरकार को उम्मीदवार बनाया है। रबीउल आलम के नाम वापस लेने के बाद अब इन दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा।
नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन दे चुकी हैं ममता
नंदीग्राम से अपनी उम्मीदवार के हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। इसके बाद मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम के उपचुनाव को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद
इन उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद भी सामने आया है। चुनाव आयोग ने आंतरिक विवाद के बीच दोनों गुटों को मूल पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोकते हुए अंतरिम रूप से अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी के गुट के सामने दोनों सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर स्थिति बदली है।
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