रुद्रा अस्पताल में युवक की मौत के बाद जांच शुरू:तीन सदस्यीय टीम ने इलाज के दस्तावेज लिए, एक हफ्ते में देगी रिपोर्ट; पुलिस भी कर रही जांच
कानपुर के कल्याणपुर के बरासिरोही स्थित रुद्रा अस्पताल में सड़क हादसे में घायल 26 वर्षीय प्रांशु की उपचार के दौरान मौत और इसके बाद हुए हंगामे के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हरि दत्त नेमी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। टीम ने बुधवार को अस्पताल पहुंचकर युवक के इलाज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दवाइयों के पर्चे समेत अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। अब इन दस्तावेजों की पड़ताल कर यह देखा जाएगा कि युवक के इलाज में तय चिकित्सा मानकों का पालन हुआ था या नहीं। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) रमित रस्तोगी ने बताया कि सीएमओ के निर्देश पर जांच टीम गठित की गई है। टीम को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हादसे में घायल होने के बाद कराया था अस्पताल में भर्ती शिवली थाना क्षेत्र के हरिकिशनपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके चचेरे भाई प्रांशु (26) 30 सितंबर की रात करीब नौ बजे मोटरसाइकिल से मैथा की ओर जा रहे थे। रास्ते में सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें इलाज के लिए बरासिरोही स्थित रुद्रा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। परिजनों के मुताबिक, करीब छह दिन तक अस्पताल में प्रांशु का इलाज चला। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज के लिए करीब 6.70 लाख रुपये की मांग की गई। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के नाम पर करीब छह लाख रुपये अस्पताल में जमा कराने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया गया। इसके बाद प्रांशु की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। चार अक्टूबर की रात इलाज के दौरान मौत
परिजनों के अनुसार, चार अक्टूबर की रात करीब आठ बजे प्रांशु की उपचार के दौरान मौत हो गई। मौत की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया और कार्रवाई की मांग की। तहरीर में धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि प्रांशु की मौत के बाद अस्पताल के कुछ लोगों ने उसकी मेडिकल फाइल और दवाइयों से संबंधित कागजात अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। इसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई।
परिजनों से मारपीट, कई लोगों के घायल होने का आरोप परिवार ने अतुल, अंशुल तिवारी और राजन दिवाकर समेत करीब 10 से 15 अज्ञात लोगों पर मारपीट का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक, घटना में बलवान सिंह की आंख में चोट लगी, अंकित की उंगली में फ्रैक्चर हुआ और अमित के सिर में गंभीर चोट आई। परिवार की महिलाओं से भी अभद्रता किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना के दौरान अस्पताल परिसर में हंगामा और पथराव भी हुआ। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। परिजनों के मुताबिक, घायलों का इलाज कल्याणपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में कराया जा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान अस्पताल संचालकों की ओर से 30 से 35 लोग सीएचसी पहुंच गए। परिवार का आरोप है कि वहां गाली-गलौज करने के साथ जान से मारने की धमकी दी गई और समझौते का दबाव बनाया गया। परिजनों ने सीएचसी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर जांच कराने की मांग की है। पुलिस अब इस फुटेज के जरिए घटना के दौरान मौजूद लोगों और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है
जांच करने पहुंची टीम को अस्पताल में मिला था ताला घटना के बाद सोमवार को एसीएमओ रमित रस्तोगी रुद्रा अस्पताल की जांच करने पहुंचे थे। उस समय अस्पताल बंद मिला और मुख्य गेट पर ताला लगा था। एसीएमओ ने अस्पताल प्रबंधन से फोन पर संपर्क कर इलाज और पंजीकरण से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। अब बुधवार को जांच टीम ने अस्पताल से उपचार से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। इन दस्तावेजों में प्रांशु के भर्ती होने से लेकर मौत तक के इलाज का पूरा रिकॉर्ड देखा जाएगा। जांच में यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल में इलाज के दौरान कौन-कौन से उपचार और प्रक्रियाएं अपनाई गईं और ऑपरेशन के लिए जमा कराई गई रकम से संबंधित रिकॉर्ड क्या है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह होगी स्पष्ट प्रांशु के शव का पोस्टमार्टम सोमवार देर शाम कराया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी। इसके बाद इलाज में लापरवाही के आरोपों की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
कल्याणपुर थाना प्रभारी केशव कुमार तिवारी ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। अस्पताल में युवक के भर्ती होने से लेकर उसकी मौत तक के घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। मेडिकल रिकॉर्ड, दवाइयों के पर्चे, जांच रिपोर्ट, भुगतान से संबंधित दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
बवाल करने वालों की भी तलाश, डीवीआर कब्जे में
युवक की मौत के बाद अस्पताल में हुए हंगामे, मारपीट और पथराव के मामले में पुलिस ने अस्पताल की डीवीआर भी कब्जे में ले ली है। फुटेज खंगालकर घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस अस्पताल के साथ ही सीएचसी में लगे कैमरों की फुटेज भी जांच के दायरे में ला रही है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट और पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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