सॉयल हेल्थ कार्ड से किसानों की लागत घटी, फसल सुधरी:मिट्टी की जांच से मिला खाद का सही हिसाब, बदली खेती की तस्वीर
कानपुर देहात में सॉयल हेल्थ कार्ड योजना से किसानों को काफी फायदा मिल रहा है। इस योजना से उन्हें पता चल रहा है कि खेत की मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कम हैं और फसल के लिए कितनी खाद की जरूरत है। अकबरपुर तहसील के किसान मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खेती के तरीके बदल रहे हैं। किसानों का कहना है कि मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से अनावश्यक खाद और कृषि सामग्री का इस्तेमाल कम हुआ है। इससे खेती की लागत को कंट्रोल करने में मदद मिल रही है। मारवाड़ी गांव के 55 साल के किसान ओम प्रकाश ने बताया कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने कृषि विभाग से संपर्क किया। विभाग ने उनके खेत से मिट्टी का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें फसल के लिए जरूरी पोषक तत्वों और खाद के इस्तेमाल के बारे में सलाह दी गई। ओम प्रकाश के मुताबिक, इस सलाह पर खेती करने से फसल में अच्छे नतीजे मिले हैं। मुक्तापुर गांव के 50 साल के किसान लाल सिंह कई सालों से धान की खेती कर रहे हैं। उन्होंने भी अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाई। रिपोर्ट से उन्हें खेत में मौजूद पोषक तत्वों और उनकी कमी के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने फसल की जरूरत के हिसाब से खाद और दूसरी कृषि सामग्री का इस्तेमाल करना शुरू किया। किसानों का कहना है कि पहले जानकारी न होने के कारण वे अंदाजे से यूरिया, डीएपी और कीटनाशकों का इस्तेमाल करते थे। इससे कई बार खेती का खर्च बढ़ जाता था। अब मिट्टी की जरूरत के हिसाब से सामग्री का इस्तेमाल करने से खर्च कंट्रोल हो रहा है और फसल की क्वालिटी भी अच्छी बनी हुई है। सॉयल हेल्थ कार्ड योजना में मिट्टी के मुख्य मानकों की जांच की जाती है। इसके बाद किसानों को रिपोर्ट और खेती से जुड़ी सलाह दी जाती है। यह कार्ड आमतौर पर तीन साल के लिए बनाया जाता है। कृषि विभाग किसानों को मिट्टी की जांच और जरूरी सलाह की सुविधा दे रहा है।
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