सादिक अली के शिष्य बना रहे रावण:गाजीपुर में आज 60 फीट के रावण का दहन, जलती आंखें और संवाद होंगे खास
गाजीपुर के लंका मैदान में मंगलवार रात आठ बजे 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला बटन दबाकर रावण का दहन करेंगे। इस बार दस सिर वाले दशानन की जलती आंखें, रावण के संवाद और आतिशबाजी लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे। पुतले के साथ 17 फीट लंबी तलवार और 16 फीट का विशाल जूता भी तैयार किया गया है। इस भव्य पुतले के पीछे करीब ढाई महीने की मेहनत और 43 साल पुरानी परंपरा जुड़ी है। सुजावलपुर निवासी 68 वर्षीय छोटेलाल प्रजापति छह कारीगरों की टीम के साथ एक अगस्त से इसे तैयार करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि रावण बनाने की इस कला को कभी मुस्लिम कारीगर सादिक अली ने आगे बढ़ाया था। अब उनके शिष्य छोटेलाल उसी हुनर और विरासत को संभाल रहे हैं। 70 बांस, साढ़े 7 कुंतल कागज से तैयार हुआ दशानन रावण का पुतला तैयार करने में 70 बांस, साढ़े सात कुंतल कागज और 100 किलो मैदा का इस्तेमाल किया गया है। छोटेलाल प्रजापति और उनकी टीम ने पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दस सिर वाले रावण को भव्य रूप दिया है। कारीगरों ने करीब ढाई महीने तक रोजाना आठ घंटे काम करके इसे तैयार किया। पुतले को आकर्षक बनाने के लिए उसकी सजावट पर भी खास ध्यान दिया गया है। कोलकाता से कपड़ा मंगाकर रावण को राजा जैसी पोशाक पहनाई गई है। उसके दस सिरों और शरीर को विशेष तरीके से सजाया गया है, ताकि मैदान में खड़ा दशानन दूर से ही दिखाई दे। मुस्लिम गुरु सादिक अली ने सिखाई थी रावण बनाने की कला गाजीपुर में रावण बनाने की यह परंपरा करीब 43 साल पुरानी है। हरिशंकरी के मुस्लिम कारीगर सादिक अली इस कला को आगे बढ़ाते थे। उनसे सीखे हुनर को अब उनके शिष्य छोटेलाल प्रजापति आगे बढ़ा रहे हैं। दशकों से दोनों के बीच गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए चली आ रही यह कारीगरी आज गाजीपुर के दशहरा आयोजन की पहचान बन गई है। पहले रावण के पुतले साधारण तरीके से तैयार किए जाते थे, लेकिन समय के साथ उनकी बनावट और सजावट में बदलाव आया। अब खास कपड़ों, विशाल आकार की वस्तुओं और तकनीकी इंतजामों के जरिए पुतले को ज्यादा भव्य बनाया जाता है। छोटेलाल और उनकी टीम हर साल इसी परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटती है।
जलेंगी आंखें, सुनाई देंगे रावण के संवाद इस बार रावण के पुतले में आंखों के लिए लाइटें लगाई गई हैं। दहन से पहले पुतले से रावण के संवाद भी सुनाई देंगे। इसके पूरे शरीर में आतिशबाजी का इंतजाम किया गया है। करीब 50 हजार रुपये के पटाखे लगाए गए हैं, जो दहन के दौरान जलेंगे। रावण के साथ बनाई गई 17 फीट लंबी तलवार और 16 फीट का विशाल जूता भी पुतले की भव्यता बढ़ाएंगे। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कारीगरी के मेल से तैयार यह दशानन इस बार लोगों के लिए खास आकर्षण रहेगा। रामलीला के बाद रात आठ बजे होगा रावण दहन लंका मैदान में रामलीला मंचन के दौरान भगवान राम और रावण के युद्ध का प्रसंग दिखाया जाएगा। इसके बाद मंगलवार रात आठ बजे रावण दहन होगा। आयोजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में मैदान में भीड़ को व्यवस्थित रखने और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने की व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस आयोजन के साथ छोटेलाल प्रजापति की मेहनत और उनके गुरु सादिक अली से मिली कला की विरासत भी सामने आती है। दशकों से चली आ रही यह परंपरा गाजीपुर के दशहरे को खास पहचान देती है।
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