सौरभ हत्याकांड:मुस्कान को फांसी हुई तो मथुरा जेल लाई जाएगी, महिलाओं के लिए यहीं बना है फांसीघर

Oct 15, 2026 - 08:43
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सौरभ हत्याकांड:मुस्कान को फांसी हुई तो मथुरा जेल लाई जाएगी, महिलाओं के लिए यहीं बना है फांसीघर
मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मथुरा जिला जेल एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने के लिए निर्धारित फांसीघर मथुरा जेल में है। हालांकि, आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी दिए जाने का मामला सामने नहीं आया है। मुस्कान और साहिल को मार्च 2025 में सौरभ की हत्या करने, शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने के मामले में दोषी ठहराया गया है। दोनों को सजा सुनाए जाने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर है। फिलहाल मथुरा जेल प्रशासन का कहना है कि उसे मुस्कान को फांसी देने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। 155 साल पहले ब्रिटिश शासन में बना था फांसीघर मथुरा जिला जेल में महिलाओं को फांसी देने के लिए अलग फांसीघर बना है। यह जेल की बैरकों से अलग एकांत में स्थित है और चारों ओर ऊंची दीवारें हैं। इसके आसपास की जमीन पर खेती की जाती है। बताया जाता है कि यह फांसीघर करीब 155 साल पहले ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने की व्यवस्था के लिहाज से मथुरा जेल का विशेष महत्व है। शबनम की फांसी की तैयारी के दौरान आया था चर्चा में अमरोहा की शबनम को अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्या करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। 15 अप्रैल 2008 को हुई इस वारदात में शबनम के साथ उसके प्रेमी को भी दोषी ठहराया गया था। करीब पांच साल पहले शबनम की दया याचिका खारिज होने के बाद मथुरा जेल के फांसीघर को दुरुस्त कराया गया था। उस समय जल्लाद पवन ने भी फांसीघर का निरीक्षण किया था। हालांकि, शबनम को अब तक फांसी नहीं दी गई है और वह रामपुर जेल में बंद है। बक्सर जेल में तैयार होती है फांसी की रस्सी फांसी के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष रस्सी बिहार की बक्सर जेल में तैयार की जाती है। इसके लिए खास किस्म का जे-34 कॉटन इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पंजाब से मंगाया जाता है। बक्सर जेल में ब्रिटिश शासन के दौरान 1844 में फांसी की रस्सी तैयार करने की इकाई स्थापित की गई थी। तब से यहां के प्रशिक्षित कैदी फांसी के लिए इस्तेमाल होने वाली रस्सी तैयार करते रहे हैं। फांसी से पहले पूरी करनी होती है कानूनी प्रक्रिया मुस्कान और साहिल को सजा सुनाए जाने के बाद फांसी की तारीख तय होने से पहले कई कानूनी चरण पूरे होने हैं। मौत की सजा के मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील और उपलब्ध कानूनी उपायों की प्रक्रिया हो सकती है। दया याचिका का विकल्प भी कानूनी प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध रहता है। सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि फांसी तुरंत दे दी जाएगी। आगे की प्रक्रिया और अंतिम निर्णय के बाद ही तारीख तय हो सकती है। जेल प्रशासन को अभी नहीं मिली सूचना मथुरा जेल के अधीक्षक अंशुमन गर्ग के मुताबिक, मुस्कान को फांसी देने के संबंध में अभी जेल प्रशासन को कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि फांसी की स्थिति में नियमानुसार ब्लैक वारंट जारी होने और जेल प्रशासन को सूचना मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। मार्च 2025 में हुई थी सौरभ की हत्या मेरठ के सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मार्च 2025 में सौरभ की हत्या की थी। इसके बाद शव के पांच टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में रखा गया और ऊपर से सीमेंट का घोल डाल दिया गया था। मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली। इस दौरान 127 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से अधिक गवाहों ने बयान दिए। 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई।

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