शामली में आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन:राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग, विधायक को सौंपा ज्ञापन
शामली में गुरुवार सुबह 11 बजे आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पिछले 21 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर पहुंचाने का काम कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं ने सदर विधायक प्रसन्न चौधरी के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मुख्यमंत्री से समस्याओं का समाधान कराने और आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की। टीकाकरण और डिलीवरी के बहिष्कार की चेतावनी आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि पोलियो अभियान, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, प्रसव, संचारी रोग नियंत्रण और दूसरी स्वास्थ्य योजनाओं में वे वर्षों से काम कर रही हैं। फील्ड में किसी बच्चे के पोलियो ड्रॉप से छूटने पर उसकी जानकारी जुटाने से लेकर मोबाइल नंबर, आधार, बीमारी और उसके ठिकाने की जानकारी तक जुटाने की जिम्मेदारी भी आशाओं पर रहती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ उनके अधिकार, सम्मान और भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के ‘नारी सशक्तिकरण, नारी उत्थान और नारी स्वावलंबन’ के दावों का हवाला देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाली आशाओं को उचित मानदेय और कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। ‘21 साल से काम कर रहे, फिर भी कर्मचारी नहीं’ आशाओं ने कहा कि उन्होंने 21 साल पहले जिन बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाया, वे आज बड़े हो चुके हैं। कई बार वही बच्चे उनसे पूछते हैं कि सरकार ने उनके लिए क्या किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं है। विधायक बोले- मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे सदर विधायक प्रसन्न चौधरी ने आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं को उनकी मांगें शासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से शासन और मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा। वह भी अपनी ओर से मांगों की सुनवाई के लिए पैरवी करेंगे। विधायक ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर अंतिम निर्णय स्थानीय स्तर पर विधायक या जिलाधिकारी के हाथ में नहीं है। जिन मांगों पर फैसला शासन स्तर से होना है, उनका काम उनकी बात संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने सरकार की ओर से रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी समेत अन्य योजनाओं का भी उल्लेख किया। साथ ही आयुष्मान योजना के तहत पात्र लोगों को पांच लाख रुपए तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलने की बात कही। मांग नहीं मानी तो आंदोलन तेज करेंगी आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने धरना-प्रदर्शन के साथ टीकाकरण, डिलीवरी, संचारी रोग नियंत्रण समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों के बहिष्कार की चेतावनी दी है। कार्यकर्ताओं के मुताबिक, अधिकारियों की ओर से काम पर लौटने की अपील की जा रही है, लेकिन मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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