शामली में ओबीसी की अलग गणना की मांग:राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

Oct 13, 2026 - 14:07
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शामली में ओबीसी की अलग गणना की मांग:राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
शामली में जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अलग विकल्प देने और जातिवार जनसंख्या की सटीक गणना के लिए मानकीकृत कोड आधारित प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने जिलाधिकारी के माध्यम से मंगलवार को 12 बजे राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर ओबीसी की गणना के लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराने और जातियों की आधिकारिक निर्देशिका तैयार करने की मांग उठाई। आंकड़ों की सटीकता प्रभावित होने की आशंका ज्ञापन में कहा गया कि जनगणना-2027 में जातिवार जनसंख्या की गणना का निर्णय समावेशी नीति निर्माण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रश्नावली में ओबीसी का अलग विकल्प नहीं होने और जाति दर्ज करने के लिए ओपन कॉलम की व्यवस्था से आंकड़ों की सटीकता प्रभावित होने की आशंका है। संगठन ने आरोप लगाया कि इससे ओबीसी सहित विभिन्न जातियों की वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े जुटाने में कठिनाई हो सकती है। मोर्चा ने वर्ष 2011 में जातियों के आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय ओपन कॉलम के माध्यम से जुटाए गए आंकड़ों में भ्रम की स्थिति बनी थी और आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए थे। संगठन ने मांग की कि एससी-एसटी की तरह ओबीसी की गणना के लिए भी स्पष्ट और मानकीकृत प्रक्रिया अपनाई जाए। ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें ओबीसी के लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराने, राज्यवार आधिकारिक जाति निर्देशिका तैयार करने, प्रत्येक जाति को विशिष्ट कोड देने, ओपन कॉलम के स्थान पर मानकीकृत विकल्प आधारित प्रणाली लागू करने, असूचीबद्ध और स्थानीय जातियों के सत्यापन के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने तथा जाति संबंधी आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और ऑडिट योग्य बनाने की मांग शामिल है। आगामी चरणों का भी उल्लेख किया राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने ज्ञापन में आंदोलन के आगामी चरणों का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, 5 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक 'चलो गांव की ओर' साइकिल यात्रा प्रस्तावित है। इसके बाद 3 नवंबर को जिला मुख्यालयों पर साइकिल रैली और प्रदर्शन तथा 30 नवंबर 2026 को भारत बंद का कार्यक्रम घोषित किया गया है। संगठन ने केंद्र सरकार से जनगणना-2027 में जातिवार आंकड़ों के वैज्ञानिक और विश्वसनीय संकलन के लिए आवश्यक बदलाव करने की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि मानकीकृत व्यवस्था से जातिवार आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

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