होर्मुज में तनाव से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर खुले

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और गोलीबारी की खबरों के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिली। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

होर्मुज में तनाव से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर खुले

दि राइजिंग न्यूज | 11 मई 2026 ।

शेयर बाजार में आज सुबह भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और गोलीबारी की खबरों का सीधा असर भारतीय बाजार पर देखने को मिला। निवेशकों में बढ़ी अनिश्चितता के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर खुले और शुरुआती कारोबार में ही दबाव में आ गए।  वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।


सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती गिरावट

आज बीएसई सेंसेक्स लगभग दो सौ से अधिक अंकों की गिरावट के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में और नीचे फिसल गया। वहीं एनएसई निफ्टी ने भी कमजोर शुरुआत करते हुए लगभग नब्बे से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की। शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख शेयरों पर दबाव देखा गया, जिनमें बैंकिंग, ऊर्जा और ऑटो सेक्टर प्रमुख रूप से शामिल रहे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए बिकवाली का रुख अपनाया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया।


गिरावट की मुख्य वजह क्या है

बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इस क्षेत्र में हुई गोलीबारी की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलमार्ग दुनिया के कच्चे तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता सीधे ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।


कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड और अन्य प्रमुख तेल बेंचमार्क में उछाल दर्ज किया गया है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण है क्योंकि देश बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई और व्यापार घाटे पर भी दबाव बढ़ सकता है।


एशियाई और अमेरिकी बाजारों पर असर

एशियाई बाजारों में भी आज मिलाजुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ में सीमित तेजी भी देखी गई। अमेरिकी बाजार पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां निवेशकों में महंगाई बढ़ने और ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बनी रही। इसका असर वैश्विक निवेश धारणा पर भी पड़ा है।


निवेशकों की चिंता और बाजार का रुख

वैश्विक तनाव के चलते निवेशक फिलहाल सतर्क बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कई निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।


होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।