एक दिन में 10.52 लाख करोड़ रुपये डूबे! शेयर बाजार में भारी गिरावट
8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,231 अंक से अधिक टूटा, जबकि निफ्टी में भी 413 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई। इस बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। ब्याज दर में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 8 अक्टूबर 2026
8 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सप्ताह के दौरान बाजार में लगातार बने दबाव के बीच गुरुवार को प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के कारण शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बड़ी कमी आई और निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
गुरुवार के कारोबार के दौरान बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1.69 प्रतिशत यानी 1,231.91 अंक टूटकर 71,406.79 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 1.82 प्रतिशत यानी 413.05 अंक गिरकर करीब 22,190 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में तेज बिकवाली के कारण कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
निवेशकों के 10.52 लाख करोड़ रुपये डूबे
शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बाजार में बिकवाली बढ़ने के कारण निवेशकों को करीब 10,51,614.06 करोड़ रुपये यानी 10.52 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बुधवार को कारोबार समाप्त होने के समय बंबई शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये था, जो गिरकर 4,61,83,659.33 करोड़ रुपये रह गया।
पूरे सप्ताह दबाव में रहा बाजार
भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह उतार-चढ़ाव का दौर लगातार बना हुआ है। सोमवार को कारोबार की शुरुआत में बाजार में तेजी दिखाई दी थी और मंगलवार को भी स्थिति अपेक्षाकृत संभली हुई थी। हालांकि बुधवार से बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया और गुरुवार को सेंसेक्स तथा निफ्टी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के अंत की ओर बढ़ते बाजार में निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
रिजर्व बैंक के फैसले का भी असर
बाजार में गिरावट के पीछे रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। बुधवार को तीन दिन तक चली बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। ब्याज दर बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है, जिसका असर बाजार में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी से देश के आयात खर्च पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है और बाजार में बिकवाली का दबाव बन सकता है।
रुपये की कमजोरी भी बनी वजह
अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी का असर भी शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा है। रुपये पर लगातार दबाव रहने से आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो सकता है। बाजार में पहले से मौजूद नकारात्मक माहौल के बीच रुपये की कमजोरी ने चिंता और बढ़ा दी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मौजूदा समय में विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में बिकवाली देखने को मिल रही है। बाजार में विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ने से शेयरों की कीमतों पर दबाव बनता है। गुरुवार की भारी गिरावट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बाजार में आगे क्या
शेयर बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर रहेगी। ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का बाजार की दिशा पर असर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है और निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की जरूरत होगी।
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