सहारनपुर में कलेक्ट्रेट गेट बंद मिला तो भड़के कांग्रेसी:ऊपर चढ़कर घुसने की कोशिश, पुलिस से धक्का-मुक्की, डीएम को ज्ञापन देने पहुंचे थे कांग्रेस कार्यकर्ता

Sep 28, 2026 - 13:35
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सहारनपुर में कलेक्ट्रेट गेट बंद मिला तो भड़के कांग्रेसी:ऊपर चढ़कर घुसने की कोशिश, पुलिस से धक्का-मुक्की, डीएम को ज्ञापन देने पहुंचे थे कांग्रेस कार्यकर्ता
सहारनपुर में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कलेक्ट्रेट गेट पर जमकर धक्का-मुक्की हो गई। जिला कांग्रेस कमेटी और महानगर कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता रामलीला मैदान में एकत्रित होने के बाद जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। कार्यकर्ता डीएम को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया गया। इससे कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए और कुछ कार्यकर्ता गेट के ऊपर से चढ़कर अंदर जाने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई। हंगामा बढ़ने पर मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पकड़कर थाने ले गई। वहीं, हंगामे में शामिल रहे कुछ कांग्रेस पदाधिकारियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। कलेक्ट्रेट गेट पर काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। दरअसल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप सिंह राणा और महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी के संयुक्त नेतृत्व में कार्यकर्ता रामलीला मैदान से कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। कांग्रेस ने यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए जा रहे 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम डीएम के माध्यम से ज्ञापन देने की तैयारी की थी। ज्ञापन में कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग के साथ उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा कराने की मांग की है। कांग्रेस ने दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। कांग्रेस के ज्ञापन के मुताबिक, इन आपत्तियों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नए मतदाताओं को जोड़ने और पुराने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली को दिल्ली में केंद्रीकृत करने का निर्णय लिया गया और इस प्रक्रिया में दोनों निर्वाचन आयुक्तों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। कांग्रेस ने इन आरोपों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सामने आए घटनाक्रम से कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पहले लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोपों को बल मिलता है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने निर्वाचन आयोग जैसी तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था को एकल आयुक्त की तरह चलाया और राज्यों के अधिकारियों को दरकिनार करते हुए चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं। ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनावी तंत्र का इस्तेमाल सत्तारूढ़ भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों के आधार पर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप हैं। कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मांग की है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए जाएं, उन्हें पद से हटाया जाए तथा उनके कार्यकाल में लिए गए सभी निर्णयों और मतदाता सूचियों में किए गए कथित बदलावों की व्यापक एवं स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। इसके अलावा पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में की गई है। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी जांच से निर्वाचन आयोग के प्रति लोगों में पैदा हुए अविश्वास को दूर करने में मदद मिलेगी और संविधान व लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता कायम होगी। पार्टी ने देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। इधर, कलेक्ट्रेट गेट पर हुए हंगामे और पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद पुलिस की कार्रवाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है, जबकि हंगामे में शामिल बताए जा रहे अन्य पदाधिकारियों की तलाश की जा रही है। मामले में पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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