सहारनपुर में टीचर के डॉक्यूमेंट से खोला फर्जी बैंक अकाउंट:नौकरी के समय लिए थे आधार-पैन और शैक्षिक प्रमाणपत्र, खाते में 50 हजार वेतन दिखाया, 3 पर FIR
सहारनपुर में थाना सरसावा क्षेत्र में एक निजी स्कूल की शिक्षिका के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी बैंक खाता खोलने और करीब 8 लाख रुपए का लेनदेन करने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर सरसावा थाना पुलिस ने गुरुकुल ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक एवं प्रिंसिपल समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि शिक्षिका की जानकारी के बिना 2018 में शिवालिक बैंक की सरसावा शाखा में उसके नाम से खाता खोला गया। खाते में शिक्षिका का वेतन 50 हजार रुपए प्रतिमाह दर्शाया गया, जबकि उसे स्कूल से 10 हजार रुपए प्रतिमाह नकद वेतन मिलता था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर कर खाते से करीब 8 लाख रुपए का लेनदेन किया गया। थाना सदर बाजार क्षेत्र के पैरामाउंट ट्यूलिप कॉलोनी निवासी अजय बहादुर सक्सैना ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। इसमें गुरुकुल ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल, वनखंडी मंदिर के पास, नकुड़ रोड सरसावा के प्रबंधक एवं प्रिंसिपल अरुण सैनी, अनुज सैनी और पूनम सैनी को आरोपी बनाया गया। 2018 में स्कूल में शिक्षिका के रूप में नौकरी शुरू की थी शिकायत के अनुसार, अजय बहादुर सक्सैना की पत्नी ममता सक्सैना जुलाई 2018 से गुरुकुल ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल में पीजीटी जीव विज्ञान अध्यापिका के रूप में कार्यरत थीं। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें नियुक्तिपत्र नहीं दिया था। नौकरी के समय स्कूल प्रबंधन ने ममता के मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पासबुक की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो ले लिए थे। उन्हें 10 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन नकद दिया जाता था। 2020-21 में कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद रहा। इसके बाद अगस्त 2021 से वर्ष 2024 तक ममता ने दोबारा इसी स्कूल में अध्यापिका के रूप में काम किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नौकरी के दौरान ही उनके दस्तावेज स्कूल प्रबंधन के पास मौजूद थे। बायोमैट्रिक हाजिरी के नाम पर लिए थे अंगूठे और उंगलियां प्रार्थनापत्र में बताया गया कि अगस्त 2018 की शुरुआत में स्कूल प्रबंधन की ओर से सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं की बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कराने की बात कही गई थी। इसके लिए एक बायोमैट्रिक मशीन जैसा उपकरण स्कूल में लाया गया। आरोप है कि ममता के अलावा अन्य स्टाफ के दो अंगूठे और उंगलियां उस मशीन पर लगवाई गईं। अगले दिन स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि बायोमैट्रिक मशीन खराब हो गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान शिक्षकों के दस्तावेजों और पहचान संबंधी जानकारी का दुरुपयोग किया गया। 2024 में स्कूल छोड़ा, दूसरे स्कूल में नौकरी शुरू की प्रार्थनापत्र के अनुसार, 2024 के बाद ममता सक्सैना ने गुरुकुल ज्ञान गंगा स्कूल में पढ़ाना छोड़ दिया और गंगोह के सिल्वर ओक स्कूल में अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। अप्रैल 2026 के अंत में सिल्वर ओक स्कूल के प्रबंधन ने ममता से शिवालिक बैंक में खाता खुलवाने के लिए कहा। जब ममता बैंक पहुंचीं तो बैंक कर्मचारियों ने बताया कि उनके नाम से पहले से ही शिवालिक बैंक में खाता खुला हुआ है। इसके बाद अजय बहादुर अपनी पत्नी ममता को लेकर शिवालिक बैंक की शारदा नगर शाखा पहुंचे। वहां बैंक कर्मचारियों ने बताया कि ममता के नाम से शिवालिक बैंक की सरसावा शाखा में वर्ष 2018 से ही एक खाता खुला हुआ है। बैंक की ओर से खाते की स्टेटमेंट भी उपलब्ध कराई गई। खाते में करीब 8 लाख रुपए का लेनदेन मिला शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक स्टेटमेंट देखने पर खाते में अलग-अलग तारीखों में करीब 8 लाख रुपए का लेनदेन पाया गया। ममता का कहना था कि उन्होंने शिवालिक बैंक की सरसावा शाखा या किसी अन्य शाखा में कभी खाता नहीं खुलवाया। इसके बाद खाता खोलने से संबंधित फार्म और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। आरोप है कि खाता खोलने वाले दस्तावेजों पर ममता सक्सैना के अलग-अलग फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अरुण सैनी, अनुज सैनी और पूनम सैनी ने आपस में साजिश कर ममता के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और उसके नाम से फर्जी बैंक खाता खुलवाया। 10 हजार की जगह 50 हजार रुपए वेतन दिखाने का आरोप प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया गया है कि फर्जी खाते में ममता सक्सैना का मासिक वेतन 50 हजार रुपए दर्शाया गया था, जबकि स्कूल में काम करने के दौरान उन्हें केवल 10 हजार रुपए प्रतिमाह नकद वेतन दिया जाता था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से खाते में जमा रकम को आरोपियों ने स्वयं निकाल लिया। खाते में आरोपियों ने अपना मोबाइल नंबर लिंक कराया था। इसी कारण खाते में जमा और निकाली गई रकम के संबंध में ममता के मोबाइल पर कोई संदेश नहीं पहुंचा। एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से दी थी शिकायत अजय बहादुर के अनुसार, उन्होंने पूरे मामले की शिकायत 19 मई 2026 को एसएसपी सहारनपुर को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजी थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद थाना सरसावा पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद सरसावा थाना पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, खाता खोलने के लिए लगाए गए प्रपत्र, हस्ताक्षर, मोबाइल नंबर और खाते में हुए लेनदेन की जांच करेगी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि शिक्षिका के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खाता किसने और किस उद्देश्य से खुलवाया था।
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