सीएम योगी ने कहा- धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा:भारत सेवा श्रम संघ के शताब्दी समारोह में बोले- छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा
शारदीय नवरात्रि के मौके पर काशी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत सेवा श्रम संघ के शताब्दी समारोह में राष्ट्रवाद, सनातन संस्कृति, धर्म की रक्षा और सामाजिक सेवा का संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने जहां संघ के 100 वर्षों के सफर की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक संन्यासी के जीवन का ध्येय ही होना चाहिए कि धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा। देश और धर्म के लिए जो भी त्याग होगा, वह महान होगा और उसी महानता को लेकर के कार्य करना है, उसी महानता के लिए अपने आप को समर्पित करना है। राष्ट्र की विरासत, धर्म और संस्कृति की रक्षा भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, उसकी विरासत, उसकी आध्यात्मिक धरोहर, उसकी ऐतिहासिक धरोहर, उसके मान बिंदु, उसके धर्म और संस्कृति, इन सब के ऊपर भी संकट आता है। काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते, तो क्या काशी में बाबा विश्वनाथ की इस पावन धरा पर, बाबा विश्वनाथ के पावन मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस कोई कर सकता था? राम जन्मभूमि पर 500 वर्षों तक गुलामी का कलंक (ढांचा) खड़ा रहता? मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि पर गुलामी का कलंक खड़ा रहता? कभी नहीं होता। उन्होंने कहा कि ये वही पाप है जो आपने बंट कर के किया था। उसी पाप का परिमार्जन करने के लिए इन संतों ने अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग कालखंड में उस महाजागरण के अभियान को अपनी आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बनाया था, जिसमें स्वामी प्रणवानंद जी ने भी उसी आध्यात्मिक साधना को आगे बढ़ाया। शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं, राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ की परंपरा में पूजा केवल धूप और दीया से ही नहीं होती, अस्त्र-शस्त्र से भी मां जगत जननी मां भगवती की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि ये शस्त्र केवल धारण करने के लिए नहीं हैं, ये पूजन की भी वस्तु है और राष्ट्र रक्षा के लिए भी जब आवश्यकता पड़ती है इसको धारण करने के लिए हमें तैयार होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रणवानंद जी ने अपने समय में इस अभियान को आगे बढ़ाया था। आज भारत सेवाश्रम संघ देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अच्छा लगा कि भारत सेवाश्रम संघ आज भी उन मूल्यों से विचलित नहीं हुआ है। पश्चिम बंगाल में संन्यासियों को धमकाने का काम कर रही थी जो सरकार, वह गई
पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बंगाल में एक हिंदू विरोधी (ममता) सरकार भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों को धमकाने लग गई, मैंने कहा अब तो गई यह सरकार, अब इसको कभी नहीं आना है, क्योंकि वह अब रावण की तरह धमकाने का काम कर रही है, कंस की तरह धमकाने का काम कर रही है। संन्यासियों को धमकाने का काम कर रही है, इसका मतलब अब वह सरकार गई। उन्होंने भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों की सराहना करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में भी वे विचलित नहीं हुए। पश्चिम बंगाल चुनाव का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने बंगाल प्रवास का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां की सभाओं में संघ का कोई न कोई संन्यासी उनसे मिलने जरूर आता था। वे पहले मंच से दूर रहते थे, लेकिन उनके आग्रह पर मंच पर भी आ जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने संन्यासियों से पूछा कि कोई भय तो नहीं है, तो उनका जवाब था, नहीं, कैसा भय? क्या लेकर आए हैं, क्या लेकर जाएंगे? देश और धर्म के लिए मरेंगे, देश और धर्म के लिए जिएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही जज्बा जिसने विपरीत परिस्थितियों में भारत को भारत बनाया हुआ है। अगर यह जज्बा नहीं होता, तो क्या काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हो पाता? क्या 500 वर्षों के बाद अयोध्या का कलंक मिट करके भव्य राम मंदिर का निर्माण हो पाया होता? कभी नहीं।
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