सीमा मौर्य ने 800 महिलाओं को दिया रोजगार:गोंडा में खड़ा मसाला पैकिंग और फूलों की खेती को बनाया मुनाफे का जरिया
हौसले बुलंद हों तो राह की हर रुकावट आसान बन जाती है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है गोंडा के मुजेहना विकासखंड के बनकटी सूर्यबली गांव निवासी सीमा मौर्य ने। कभी आर्थिक तंगी झेलने वाली एक साधारण ग्रामीण गृहिणी के रूप में सफर शुरू करने वाली सीमा ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया। साल 2020 में ब्लॉक अधिकारियों से संपर्क कर सीमा ने ‘सीमा आजीविका स्वयं सहायता समूह’ की नींव रखी। शुरुआत महज 11 सदस्यों से हुई थी। उस समय समूह की आमदनी शून्य थी और कई बार उन्हें अपनी जेब से भी पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसके बावजूद सीमा ने हिम्मत नहीं हारी। बीते छह वर्षों की कड़ी मेहनत, लगन और लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों की बदौलत आज करीब 50 नए समूह खड़े हो चुके हैं। इन समूहों से जुड़कर करीब 800 ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबी जीवन जी रही हैं। हर महिला 6 हजार महीना कमा रही सीमा से जुड़ी महिलाएं खड़ा मसाला की पैकिंग और फूलों की खेती का काम कर रही हैं। तैयार उत्पादों को लखनऊ, कानपुर समेत अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है। इससे महिलाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और उन्हें आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। सीमा बताती हैं कि छह साल पहले तक उन्हें अपने खर्च के लिए पति पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वह अपनी कमाई से ही खर्च चला रही हैं। जरूरत पड़ने पर परिवार की आर्थिक मदद भी करती हैं। वर्तमान में वह करीब 6 हजार रुपये महीने कमा रही हैं। सीमा मौर्य प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी महिलाओं तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। इन योजनाओं से महिलाओं को जोड़कर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सीमा मौर्य ने बताया, “मेरे समूह का नाम सीमा आजीविका स्वयं सहायता समूह है। मैं एक समूह सखी भी हूं।” 700-800 महिलाएं कर रही हैं काम सीमा ने बताया, “मेरे साथ जुड़कर 700-800 महिलाएं काम कर रही हैं। मैं महिलाओं को रोजगार देने का काम कर रही हूं। हमारे समूह से भी कई महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो अलग-अलग तरह के रोजगार कर रही हैं।” उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाएं खड़ा मसाला की पैकिंग और फूलों की खेती का काम कर रही हैं। कुछ महिलाएं कोल्ड ड्रिंक का कारोबार भी कर रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं से महिलाओं को जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और लगातार जागरूक किया जा रहा है। सीमा का कहना है कि महिलाओं को अपना काम करना चाहिए। पति अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए कुछ न कुछ काम करना चाहिए। इससे वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार देकर उन्हें बेरोजगारी से बाहर निकालने में मदद कर सकेंगी।
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