सीता कुंड में महिलाओं ने किया पितरों का तर्पण:मिर्जापुर में बिहार-मध्य प्रदेश से भी पहुंचीं श्रद्धालु, पिंडदान कर सुख-समृद्धि की कामना की
मिर्जापुर में मातृ नवमी के अवसर पर रविवार को विंध्याचल स्थित सीता कुंड पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया। सुबह से ही सीता कुंड पर श्रद्धालु महिलाओं का आवागमन शुरू हो गया था। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर पितरों को जल अर्पित किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। धार्मिक मान्यता के चलते सीता कुंड को पितरों के तर्पण के लिए विशेष और पवित्र स्थान माना जाता है। स्थानीय महिलाओं के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु महिलाएं यहां पहुंचीं। महिलाओं ने कुंड में स्नान और पूजन के बाद तर्पण किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने विंध्य क्षेत्र में अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। इसी मान्यता के चलते सीता कुंड को पितरों के तर्पण के लिए विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां तर्पण करने से पितरों को शांति और तृप्ति मिलती है। मान्यता है कि भगवान राम ने गुरु वशिष्ठ के आदेश पर अपने पिता राजा दशरथ की स्वर्ग प्राप्ति के लिए गया की फल्गु नदी के तट पर पिंडदान किया था। इसी दौरान माता सीता ने विंध्य पर्वत क्षेत्र में कुंड का निर्माण कर अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। तभी से सीता कुंड में मातृ नवमी के दिन महिलाओं द्वारा पितरों का तर्पण करने की परंपरा चली आ रही है। पुत्रों के तर्पण की परंपरा के बीच महिलाओं की विशेष आस्था भारतीय शास्त्र परंपरा में सामान्यतः पुत्रों द्वारा पिंडदान और तर्पण किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसके बावजूद सीता कुंड की धार्मिक मान्यता के कारण मातृ नवमी पर बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचकर अपने पितरों को तर्पण करती हैं। स्थानीय महिलाओं के साथ बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु महिलाएं सीता कुंड पहुंचती हैं। विंध्य पहाड़ी से निकलने वाला जल और चरण चिह्न आस्था का केंद्र सीता कुंड को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। यहां विंध्य पहाड़ी से निकलने वाला जल और माता सीता के चरण चिह्न श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। महिलाओं ने कुंड पर स्नान-पूजन के बाद पितरों को जल अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। ‘पितरों को जल अर्पित करने से मन को मिलती है शांति’ श्रद्धालु मंजू पांडेय ने बताया कि मातृ नवमी पर सीता कुंड में तर्पण करने की परंपरा काफी पुरानी है। यहां आकर पितरों को जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है। साथ ही माता सीता के प्रति श्रद्धा भी प्रकट होती है।
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