'संकट के कटैया’ गायक सुधीर लोधी पहुंचे बनारस:बोले- काशी बहुत अच्छी लगी, काफी दिनों से आने की इच्छा थी
हनुमान अंश फिल्म का चर्चित भजन ‘संकट के कटैया' हनुमान हमारे’ गाने वाले सुधीर लोधी नमो बुक फेस्टिवल के दौरान बनारस पहुंचे। उन्होंने बताया कि ‘संकट के कटैया’ गाना करीब आधे घंटे में रिकॉर्ड हुआ था। बनारस आने के अनुभव पर सुधीर ने कहा कि उन्हें काशी बहुत अच्छी लगी। काफी दिनों से बनारस आने की इच्छा थी, जो अब पूरी हुई। उन्होंने कहा कि बनारस का काफी नाम सुनते थे और शंकर जी महाराज की कृपा से ऐसा लगा कि उन्होंने खुद बुला लिया। दैनिक भास्कर ने सुधीर लोधी से खास बातचीत की… बचपन से ही गाने का शौक था सुधीर ने बताया कि वह बचपन से ही गाते आ रहे हैं। मम्मी-पापा ने उन्हें स्कूल में पहुंचाने की कोशिश की थी। स्कूल जाने के बाद वहां की कुछ व्यवस्थाएं देखकर उनके माता-पिता उन्हें वापस घर ले आए। इसके बाद घर पर ही वह सीखते रहे और गाने सुनकर गाने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया कि जब उनके हाथ में तंबूरा आया तो हनुमान जी महाराज की ऐसी कृपा हुई कि वह खुद से गाने बनाने लगे। दादाजी को कभी देखा नहीं, गांव वालों से सुने किस्से अपने दादाजी के बारे में बात करते हुए सुधीर ने बताया कि उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं और उनकी आवाज भी नहीं सुनी। उनके दादाजी का निधन उनकी मम्मी की शादी के समय ही हो गया था। गांव के लोग बताते हैं कि उनके दादाजी बुंदेली में लोकगीत गाया करते थे। सुधीर कहते हैं कि जब गांव के लोग बताते हैं कि उनके दादाजी ऐसे गाते थे तो मन में आता है कि वह कैसे गाते होंगे। स्कूली पढ़ाई नहीं कर पाए सुधीर सुधीर ने बताया कि उनके पिता किसान हैं। परिवार में मम्मी-पापा, दो भाई-बहन हैं। बहन की शादी हो चुकी है और उनसे छोटा एक भाई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की। गांव में स्कूल था और छोटे भाई के साथ स्कूल गए थे। वहां उनके शिक्षक दुबे जी ने उन्हें थोड़ा सिखाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, उन्होंने इतना सिखाया कि वह दूसरों के सामने एक बोल लेने लायक हो गए। 14 साल की उम्र से गाने को लेकर गंभीर हुए सुधीर ने बताया कि गाने का शौक बचपन से था। उन्हें लगता है कि करीब 14 साल की उम्र से उन्होंने गाना शुरू किया था। हालांकि मम्मी-पापा कहते हैं कि वह बहुत बचपन से गाते थे। बचपन में ‘यशोमती मैया से बोले नंदलाला’ जैसे गाने उन्हें पसंद थे। वह इन्हें गाते रहते थे। कहा- कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई, माहौल खुशी-खुशी बदला अपनी आर्थिक स्थिति और संघर्ष के बारे में पूछे जाने पर सुधीर ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई बड़ी परेशानी महसूस नहीं की। उन्होंने लगातार वीडियो बनाने की कोशिश की और फिर अचानक उनके गाने वायरल होने लगे। पहला गाना वायरल हुआ तो बदलने लगा सफर सुधीर ने बताया कि उनका एक बुंदेलखंडी गाना ‘दूल्हा बन गए मोर को आओ’ था। इसके बाद पार्थ भैया के साथ इसी तर्ज पर ‘दूल्हा बन के आ गए जीजा जी’ गाना बनाया। यह भी उनके बुंदेलखंडी चैनल पर अच्छा चला। इसके बाद ‘संकट के कटैया, हनुमान हमारे’ आया। सुधीर ने कहा कि इसके बाद उन्हें लगा कि शायद हनुमान जी महाराज ने उनका जीवन बदलने का फैसला कर दिया। मुंबई में पोस्ट देखकर मिला गाने का मौका सुधीर ने बताया कि उन्हें फिल्म में गाने का कोई सीधा ऑफर पहले नहीं मिला था। वह कुछ और गाने रिकॉर्ड करने के लिए मुंबई गए थे। वहां स्टूडियो में रिकॉर्डिंग की। लंच के बाद घूमने निकले और मुंबई में होने की एक पोस्ट डाली। इसी पोस्ट पर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर पड़ी। उन्होंने सुधीर को बुलाया। सुधीर ने उन्हें तीन-चार गाने सुनाए। इनमें से एक गाना उन्होंने करीब आधे घंटे में रिकॉर्ड कर भेजा था। बनारस में संकटमोचन और काशी विश्वनाथ जाएंगे बनारस में अपने प्लान के बारे में सुधीर ने कहा कि अभी संकटमोचन जाने का प्लान है। इसके बाद काशी विश्वनाथ जाएंगे। उन्होंने कहा कि बनारस में जो भी मंदिर होंगे, वहां जाने की कोशिश करेंगे।
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