संत प्रेमानंद महाराज ने किया सत्संग:इशारों इशारों में दिया जवाब,कहा भगवान की भक्ति का मार्ग विचित्र मार्ग,प्रतिकूलता,अपमान और निंदा वह पुष्प हैं जो भगवान की सुगंध देते हैं
साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद संत प्रेमानंद महाराज का सत्संग करते हुए वीडियो सामने आया। इस वीडियो में संत प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भगवान की भक्ति का मार्ग विचित्र मार्ग है। इस मार्ग पर चलने वाले उपासक को सबसे पहले धैर्यवान होना चाहिए। उन्होंने कहा जब कोई भगवान के मार्ग पर चलता है,भगवान से जुड़ता है उसको आनंद,अनुकूलता,प्रशंसा,सम्मान ये सब प्राप्त होने लगती है। लेकिन जब भगवान उससे प्यार करने लगते हैं तो फिर दूसरी बात हो जाती है। भगवान प्यार करते हैं तो प्रतिकूलता की कसौटी होती है संत प्रेमानंद महाराज ने सत्संग में कहा कि भगवान जब प्यार करते हैं तो ऐसी कसौटी होती है जैसे मेरा जी के देवर ने ही हद कर दी। मीरा जी को इतना कष्ट दिया कि पूछो मत,हद कर दी हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद जी को कष्ट देकर। उन्होंने कहा प्रतिकूलता,अपमान,निंदा यह वह पुष्प हैं जिससे पता चलता है कि भगवान सुगंध रूप से हमारे हृदय में प्रकाशित होने वाले हैं। पर इसको सहना बहुत कठिन है। उन्होंने कहा जब हमारी प्रशंसा होती है,4 लोग दंडवत करते हैं तो अच्छा लगता है कि भगवान की भक्ति का लाभ मिल रहा है। लेकिन वही 4 लोग अपमान करने लगते हैं,निंदा करने लगते हैं तो लगता है कहां गए भगवान। लेकिन उसी समय सावधान होना चाहिए क्योंकि उसी समय भगवान की विशिष्ट कृपा उतर रही है हृदय में। निर्दोष रहने पर अपमान हो तो भगवान की कृपा होती है संत प्रेमानंद महाराज ने सत्संग के दौरान रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद पिछले कुछ दिनों से चल रहे प्रकरण को लेकर इशारों इशारों में कहा कि यकीन मानिए आप जब अपमान,निंदा और तिरस्कार समाज के अंदर होने लगे निर्दोष होते हुए तब भगवान की विशुद्ध कृपा होती है और वह भक्ति के सोपान में उन्नतिशील होता है। जो धैर्यपूर्वक दीक्षा,सहनशीलता हृदय में धारण करता है। वह व्याकुल नहीं होता, ऊब नहीं जाता भगवान पर अश्रद्धा नहीं करता कितनी भी प्रतिकूलता हो। ये जीवन प्रियालल को अर्पित कर देते हैं। जैसे वह नचाएगी वैसे ही नाचना पड़ेगा। हम बुद्धि न लगाएं संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हम बुद्धि न लगाएं अपनी बुद्धि को प्रभु के चरणों में शरणागत कर दें। उन्होंने सत्संग के दौरान उड़िया बाबा के उपदेशों की 20 बातों का भी जिक्र किया। जिसमें उन्होंने कहा डरिए मत,सत्य बोलिए। यदि आपसे गलती हुई दंड मिलेगा,निंदा होगी आप पवित्र हो जाएंगे। लेकिन आप उसे छुपा लेंगे तो पाप जमा हो जाएगा और एक झूठ छिपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ेंगे। उन्होंने कहा अगर भगवद प्राप्ति करनी है तो सत्य का आश्रय लेना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने कहा कभी किसी की निंदा न करें। उन्होंने कहा यह अज्ञानी हैं जो सांसारिक लाभ के लिए भगवान के भक्तों की, संतों की निंदा करते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा भगवान की माया को समझकर अनुकूलता में हर्षित न हों और प्रतिकूलता में शोकित न हों।
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