सफाईकर्मियों ने मानदेय बढ़ाने की मांग की:15-18 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक मांगा, मैनपुरी में बोले- समय पर भुगतान भी नहीं मिल रहा
ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे स्वच्छताग्राहियों ने मानदेय बढ़ाने और लंबित भुगतान कराए जाने की मांग उठाई है। सोमवार की दोपहर करीब 3 बजे स्वच्छताग्राहियों के संगठन की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर मासिक पारिश्रमिक कम से कम 15 हजार या 18 हजार रुपये किए जाने की मांग की गई है। संगठन के जिलाध्यक्ष अनुज कुमार ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड की न्याय पंचायतों और गांवों में स्वच्छताग्राहियों को सफाई कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। कर्मचारी अपने स्तर से सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक काफी कम है। संगठन का आरोप है कि कई बार भुगतान भी समय से नहीं किया जाता, जिससे कर्मचारियों के सामने परिवार का भरण-पोषण करने में आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है। स्वच्छताग्राहियों ने मुख्यमंत्री द्वारा 1 अक्टूबर 2023 को सीतापुर के नैमिषारण्य में आयोजित कार्यक्रम में दैनिक पारिश्रमिक पर काम करने वाले कर्मचारियों को गुजारे लायक मानदेय दिए जाने की बात का हवाला दिया है। उन्होंने कहा है कि उस दौरान कम से कम 15 हजार से 18 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक की आवश्यकता बताए जाने के बावजूद स्वच्छताग्राहियों के मानदेय को लेकर अब तक अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए स्वच्छताग्राही समय-समय पर लखनऊ के ईको गार्डन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। संगठन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। स्वच्छताग्राहियों ने डीएम से मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर उनकी मांग शासन तक पहुंचाने और मासिक पारिश्रमिक कम से कम 15 हजार या 18 हजार रुपये निर्धारित कराने की मांग की है। साथ ही लंबित भुगतान समय से कराए जाने की मांग भी उठाई है। संगठन ने चेतावनी नहीं, बल्कि शासन से अपने परिवारों का गुजारा चलाने योग्य पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की अपेक्षा जताई है।
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