स्पोर्टस सिटी के लिए बिल्डर ने मांगी 85 एकड़ जमीन:ग्रामीणों ने किया विरोध, सीएम को लिखा गया पत्र, बोर्ड में हस्ताक्षेप करने की मांग

Oct 27, 2026 - 06:39
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स्पोर्टस सिटी के लिए बिल्डर ने मांगी 85 एकड़ जमीन:ग्रामीणों ने किया विरोध, सीएम को लिखा गया पत्र, बोर्ड में हस्ताक्षेप करने की मांग
सेक्टर-150 की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के लिए करीब 85 एकड़ अतिरिक्त जमीन देने की मांग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने नोएडा प्राधिकरण से यह जमीन मूल आवंटन दर पर देने की मांग की है। वहीं, मोमनाथल, गढ़ी समस्तीपुर और कोंडली बांगर के ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी गैर-अधिग्रहित आबादी की जमीन को परियोजना में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने 28 अक्टूबर को प्रस्तावित प्राधिकरण की बोर्ड बैठक से पहले हस्तक्षेप कर जमीन बिल्डर को नहीं देने की मांग की है। वर्ष 2011 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 में लॉजिक्स स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट संख्या एससी-01 का आवंटन 12,050 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से करीब 8 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया था। अब इस परियोजना के लिए करीब 85 एकड़ अतिरिक्त जमीन मूल आवंटन दर पर देने की मांग उठी है। कंपनी ने 7 सितंबर 2026 को प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्लॉट के पास की जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया। कंपनी का कहना है कि इससे स्पोर्ट्स सिटी का एकीकृत विकास हो सकेगा और परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृत समाधान योजना के अनुरूप पूरा करने में मदद मिलेगी। कंपनी ने 24 सितंबर को एक और पत्र भेजकर सेक्टर-150 के गढ़ी समस्तीपुर और मोमनाथल व सेक्टर-149 के कोंडली बांगर में परियोजना से संबंधित अधिग्रहण से छूटे जमीन के हिस्सों का अधिग्रहण कराने की मांग की। कंपनी ने संबंधित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी कराने का भी अनुरोध किया है। ग्रामीणों का दावा आबादी की जमीन अधिग्रहण से बाहर मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि 2011 में एससी-01 प्लॉट आवंटित होने के बाद भूखंड और गांवों की आबादी के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए 12 मीटर चौड़ी सड़क बनाई गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि उनकी आबादी की जमीन अधिग्रहण से बाहर रही है और उसका इस्तेमाल आबादी के रूप में होता रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि प्राधिकरण की प्रस्तावित बोर्ड बैठक में करीब 85 एकड़ गैर-अधिग्रहित आबादी भूमि को परियोजना के लिए देने का निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने जमीन की श्रेणी बदलने और विधिवत अधिग्रहण के बिना जमीन परियोजना में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि एससी-01 के मूल भूखंड की सीमा से बाहर नक्शे में बदलाव की अनुमति न दी जाए और उनकी आबादी की जमीन को किसी भी तरह परियोजना में शामिल नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट की समाधान योजना का दिया हवाला लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स ने अपने पत्र में अतिरिक्त जमीन की मांग को स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के एकीकृत विकास से जोड़ा है। कंपनी का कहना है कि अतिरिक्त जमीन मिलने से परियोजना को पूरा करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के विकास के नाम पर उनकी गैर-अधिग्रहित आबादी की जमीन के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जमीन से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले राजस्व रिकॉर्ड, अधिग्रहण की स्थिति और आबादी की मौजूदा सीमाओं की जांच की जाए। अब प्राधिकरण के फैसले पर नजर एक तरफ कंपनी अतिरिक्त जमीन मूल आवंटन दर पर मांग रही है, वहीं ग्रामीण इसे अपनी आबादी की जमीन से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध कर रहे हैं। 28 अक्टूबर की प्रस्तावित बोर्ड बैठक से पहले यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। बता दे नोएडा प्राधिकरण में किसी भी जमीन का आवंटन बिड प्रक्रिया से होता है। जिसमें किसानों से जमीन अधिग्रहीत होगी इसके बाद योजना निकालकर उसका आक्शन किया जाएगा।

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