स्टर्लिंग होम्स पर 20 करोड़ की धोखाधड़ी में FIR:अलीगढ़ की सोसाइटी में 50 लाख देकर भी नहीं मिला फ्लैट, SSP से शिकायत, एंटी फ्रॉड सेल से जांच में आरोपों की पुष्टि
फ्लैट खरीदने के लिए 50 लाख रुपये दिए, कब्जा मिलने की तय समयसीमा भी गुजर गई, लेकिन न फ्लैट मिला और न रकम वापस हुई। अनूपशहर रोड स्थित स्टर्लिंग होम्स/मैसर्स क्वालिटी डेवलपर्स से जुड़ा यह मामला अब FIR तक पहुंच गया है। निवेशकों से 20 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के आरोप में कमर खान समेत पांच लोगों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले में केला नगर निवासी अमजद अली ने एसएसपी से शिकायत की थी। एसएसपी के निर्देश पर जिला पुलिस की एंटी फ्रॉड सेल ने जांच की। आरोपों की पुष्टि के बाद एसएसपी के निर्देश पर FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि परियोजना को अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) से स्वीकृत और RERA में पंजीकृत बताकर निवेशकों से रकम ली गई, जबकि परियोजना को आवश्यक मंजूरियां नहीं मिली थीं और ADA उसे सील कर चुका था।
50 लाख दिए, दिसंबर 2021 तक मिलना था कब्जा
अमजद अली के मुताबिक, उन्होंने स्टर्लिंग होम्स के फेज-III में फ्लैट नंबर 407 और 408 बुक कराए थे। इसके लिए 50 लाख रुपये दिए। दिसंबर 2021 तक कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी न फ्लैटों का कब्जा मिला और न संपत्ति का वैध पंजीकरण हुआ। कई बार संपर्क करने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने 4 जुलाई 2026 को एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
मंजूरियों और दस्तावेजों पर भी सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ब्रोशर, होर्डिंग और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए परियोजना को ADA से स्वीकृत और RERA में पंजीकृत बताया गया। शिकायतकर्ता ने नक्शे, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अन्य नियामकीय दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। निर्माणाधीन इमारत में आवश्यक मंजूरियों और अग्निशमन NOC के बिना आवंटन पत्र और बिक्री विलेख जारी करने का आरोप भी लगाया गया है। इन दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति और परियोजना की मंजूरियों की जांच अब विवेचना का अहम हिस्सा होगी।
20 करोड़ से अधिक जुटाने का दावा, पांच लोग नामजद
FIR में कमर खान, जेबा, अलीना, रफत सुलेमान और फराज जुबेरी को नामजद किया गया है। शिकायत के मुताबिक, फेज-I और फेज-III में फ्लैट, दुकान और प्लॉट बेचने के नाम पर निवेशकों से 20 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रकम वापस मांगने या संपत्ति का कब्जा चाहने पर निवेशकों को समाधान नहीं मिला। संबंधित कार्यालय बंद होने और मोबाइल नंबर बंद होने की बात भी शिकायत में कही गई है।
बैंक खातों और लेनदेन की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और कथित लेनदेन की जांच कराने के साथ रकम की बरामदगी की मांग की है। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को भी जानकारी देने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, 20 करोड़ रुपये से अधिक की रकम, अन्य निवेशकों के नुकसान और धन के कथित हस्तांतरण की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के दायरे में है।
जांच के बाद FIR, आगे की कार्रवाई पर नजर
इस मामले में पहले एसएसपी को शिकायत दी गई, फिर एंटी फ्रॉड सेल ने जांच की। आरोपों की पुष्टि के बाद एसएसपी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ है। FIR दर्ज होने का मतलब आरोप सिद्ध होना नहीं है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आरोपियों का पक्ष, गिरफ्तारी या रकम की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है। अब पुलिस की विवेचना में परियोजना की मंजूरियों, दस्तावेजों, निवेशकों से जुटाई गई रकम और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
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