जमानत खारिज होते ही गिरफ्तार, अभिषेक बनर्जी के घर से सुमित रॉय को ले गई सीआईडी
सालबोनी जमीन मामले में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को अपराध अन्वेषण विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के तुरंत बाद यह कार्रवाई हुई। सुमित रॉय को अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया।
दि राइजिंग न्यूज | कोलकाता | 10 सितंबर 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को सालबोनी जमीन मामले में अपराध अन्वेषण विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब उच्चतम न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के तुरंत बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए सुमित रॉय को हिरासत में ले लिया।
अभिषेक बनर्जी के आवास से हुई गिरफ्तारी
सुमित रॉय की गिरफ्तारी इस मामले में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें उनके निजी आवास से नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। बताया गया है कि गिरफ्तारी के समय वह अभिषेक बनर्जी के आवास पर मौजूद थे। उच्चतम न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद अपराध अन्वेषण विभाग की टीम ने वहां पहुंचकर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। मामला जमीन से जुड़े कथित अनियमितताओं और धन के लेनदेन की जांच से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी लंबे समय से सुमित रॉय से पूछताछ कर रही थी और अब गिरफ्तारी के बाद उनसे हिरासत में पूछताछ किए जाने की संभावना है।
उच्चतम न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
सुमित रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को उन्हें गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद सुमित रॉय ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने पहले सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। हालांकि, उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया था। अब उच्चतम न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद जांच एजेंसी के लिए उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया।
जमीन मामले में हिरासत में पूछताछ की जरूरत क्यों बताई गई
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अदालत में सुमित रॉय की हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया गया था। सरकार की ओर से दलील दी गई कि सालबोनी जमीन मामले की जांच के दौरान सुमित रॉय से कई सवाल पूछे गए, लेकिन जांच एजेंसी के अनुसार उन्होंने कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए।सरकार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े एक बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकदी जमा किए जाने की जानकारी सामने आई। इसी आधार पर राज्य सरकार ने अदालत से कहा कि मामले की पूरी कड़ियों को समझने और धन के स्रोत की जांच करने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
अब अदालत में पेश किए जाने की संभावना
सुमित रॉय की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें अदालत के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें शुक्रवार सुबह मेदिनीपुर की अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। अदालत में जांच एजेंसी उनकी हिरासत की मांग कर सकती है ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर पूछताछ की जा सके।जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित जमीन मामले में धन का लेनदेन किस तरह हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही बैंक खाते में जमा की गई बड़ी राशि के स्रोत और उसके इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर भी पूछताछ हो सकती है।
सुमित रॉय के लिए बढ़ीं कानूनी मुश्किलें
अग्रिम जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बावजूद राहत नहीं मिलने से सुमित रॉय की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय से उन्हें राहत नहीं मिली और अब उच्चतम न्यायालय ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी है।गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी की ओर से पेश किए जाने वाले साक्ष्य और हिरासत में पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारी से यह स्पष्ट हो सकता है कि सालबोनी जमीन मामले में सुमित रॉय की कथित भूमिका क्या है।
मामले में आगे क्या होगा
सुमित रॉय को अदालत में पेश किए जाने के बाद उनकी हिरासत को लेकर फैसला लिया जाएगा। यदि अदालत जांच एजेंसी को हिरासत देती है तो उनसे मामले से जुड़े धन के लेनदेन, बैंक खाते और जमीन से जुड़े आरोपों पर विस्तार से पूछताछ की जा सकती है।फिलहाल इस मामले में सुमित रॉय की गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के तुरंत बाद हुई और गिरफ्तारी अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से की गई।
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