सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को फटकारा:कहा- आपको पता होना चाहिए कब मुंह खोलना है, आपकी जगह जेल में है
चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के आदेश के बावजूद 5 करोड़ रुपए जमा नहीं करने पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।" कोर्ट में 50 लाख का डिमांड ड्राफ्ट दिखाया सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से 50 लाख रुपए के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी पेश की गई। उनके वकील ने बताया कि ड्राफ्ट बैंक में प्रोसेस हो रहा है। इस पर बेंच ने कहा कि उसे अभी यह भी नहीं पता कि ड्राफ्ट वास्तविक है या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने राजपाल यादव के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभिनेता कोर्ट में भी 'एक्टिंग' कर रहे हैं। जब राजपाल यादव के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता गरीब नहीं हैं, तो जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि वे भले ही ज्यादा अमीर हों, लेकिन जिस रकम से उन्हें नुकसान हुआ है, उस हद तक वे गरीब हैं। कल तक पैसे जमा करने का आखिरी मौका सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को एक और मौका देते हुए मंगलवार तक भुगतान करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी और इसे दिन की पहली सुनवाई के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है। कोर्ट ने इससे पहले भी उन्हें भुगतान के लिए समय दिया था। 2010 में फिल्म के लिए लिया था 5 करोड़ का फंड यह मामला करीब 16 साल पुराना है। शिकायतकर्ता कंपनी के मुताबिक, 2010 में राजपाल यादव को उनकी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए करीब 5 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद दी गई थी। फिल्म के निर्देशन और निर्माण से जुड़े राजपाल यादव पर रकम लौटाने की जिम्मेदारी थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते हुए और भुगतान के लिए चेक जारी किए गए, लेकिन उनमें से सात चेक बाउंस हो गए। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी 3 महीने की सजा मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में उनकी सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए भुगतान की शर्त रखी थी। 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। अब भुगतान की शर्त पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें आखिरी मौका दिया है। खबर अपडेट की जा रही है…
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